न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों के विभाजन के सरकारी आदेश के खिलाफ जिले के राजस्व अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पूरा राजस्व अमला कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गया है। प्रदेशभर में जारी इस आंदोलन के तहत सभी जिला इकाइयों ने कामकाज ठप कर दिया है, जिससे राजस्व प्रशासन ठप हो गया है।
जिले के सभी अधिकारी टेंट लगाकर कार्यालय परिसर में एकत्र हैं और शासकीय वाहन भी वहीं खड़े कर दिए गए हैं। विरोधस्वरूप अधिकारी केवल आपदा प्रबंधन जैसे आवश्यक कार्य ही करेंगे, अन्य सभी कार्य पूरी तरह बंद रहेंगे।
ज्ञापन सौंपा, आदेश वापसी की मांग
आंदोलन से एक दिन पहले अधिकारियों ने मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन कलेक्टर को सौंपा था, जिसमें न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों के विभाजन संबंधी आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। जिला अध्यक्ष सुनील पाटिल ने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन पूरे प्रदेश में एक साथ चल रहा है और जब तक आदेश वापस नहीं लिया जाता, कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।
जनहित कार्यों पर असर
धरने के चलते जिले की राजस्व संबंधी सेवाएँ — भूमि रिकॉर्ड, नामांतरण, वसूली और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएँ — पूरी तरह प्रभावित हो रही हैं। केवल आपदा प्रबंधन कार्य जारी है, जिससे आमजन को भूमि और राजस्व मामलों के निस्तारण में भारी परेशानी हो रही है।
प्रदेशव्यापी असर की संभावना
यह विरोध केवल शाजापुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश की जिला इकाइयाँ इसमें शामिल हैं। लंबे समय तक आदेश वापस न होने की स्थिति में प्रदेश का राजस्व तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है और कई सेवाएँ लंबे समय तक बाधित रह सकती हैं।
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