प्रदेश में किसानों की समृद्धि और कृषि विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से सरकार लगातार सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर जोर दे रही है। “हर खेत तक पानी, हर किसान तक खुशहाली” के संकल्प के साथ प्रदेश ने सिंचित क्षेत्र के विस्तार में ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की है। वर्तमान में प्रदेश का कुल सिंचित क्षेत्र लगभग 55 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है, जिसे वर्ष 2025-26 तक 65 लाख हेक्टेयर और आगे 2028-29 तक 1 करोड़ हेक्टेयर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है।

माइक्रो सिंचाई से बदलेगा खेती का भविष्य

प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ योजना के अंतर्गत माइक्रो सिंचाई तकनीकों को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो पा रहा है। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि किसानों की लागत भी घट रही है और आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार माइक्रो सिंचाई से 30 से 50 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, वहीं फसलों की उत्पादकता में 20 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। यह तकनीक विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रही है, जहां पानी की उपलब्धता सीमित है या सूखे की समस्या बनी रहती है।

प्रदेश के कई हिस्से वर्षों से अल्प वर्षा और सूखे की मार झेलते रहे हैं। माइक्रो सिंचाई योजना इन चुनौतियों से निपटने में एक मजबूत हथियार के रूप में उभर रही है। नियंत्रित मात्रा में सीधे जड़ों तक पानी पहुंचने से फसलें सुरक्षित रहती हैं और मौसम की अनिश्चितता का असर कम होता है।

सरकार का मुख्य उद्देश्य केवल सिंचाई सुविधा बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में ठोस कदम उठाना भी है। माइक्रो सिंचाई अपनाने वाले किसानों को बेहतर उत्पादन, कम खर्च और स्थिर आय का लाभ मिल रहा है। साथ ही, सब्सिडी और तकनीकी सहायता के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ा जा रहा है।

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