नववर्ष 2026 के पावन अवसर पर विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर एवं महाकाल लोक को एक भव्य और आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया जा रहा है। वडोदरा की महाराणा प्रताप समिति – डमरू फाउंडेशन द्वारा बाबा महाकाल के दरबार को डमरू और रुद्राक्ष से विशेष रूप से सजाया जा रहा है। इस धार्मिक और सांस्कृतिक पहल के तहत वडोदरा से 60 युवाओं का दल बाइक यात्रा करते हुए उज्जैन पहुँचा है, जिसे संस्था ने सनातन यात्रा का नाम दिया है।
डमरू फाउंडेशन की 60 सदस्यीय टीम सोमवार सुबह वडोदरा से रवाना होकर बाइक से उज्जैन पहुँची। यात्रा का उद्देश्य नववर्ष के शुभ आगमन पर भगवान शिव के प्रतीक स्वरूप डमरू और रुद्राक्ष से महाकालेश्वर मंदिर और महाकाल लोक को सजाकर श्रद्धा अर्पित करना है। टीम के सदस्य पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ इस सेवा कार्य में जुटे हुए हैं।
संस्था द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस सजावट में लगभग 5 लाख (5,00,000) रुद्राक्ष और 11 हजार (11,000) डमरू का उपयोग किया जा रहा है। सजावट कार्य की शुरुआत सोमवार देर रात से की गई। सबसे पहले महाकाल लोक के नंदी द्वार को डमरू, रुद्राक्ष की मालाओं और अन्य आकर्षक सामग्रियों से सजाया जा रहा है। इसके पश्चात धनुष द्वार, मानसरोवर, महाकाल मंदिर का नंदी हॉल और मंदिर परिसर को चरणबद्ध तरीके से सजाया जाएगा।
डमरू फाउंडेशन के सदस्यों ने बताया कि यह सनातन यात्रा की शुरुआत केदारेश्वर धाम (केदारनाथ) से की गई थी, जहां पहले फूलों से सजावट की परंपरा थी, लेकिन फूल कुछ दिनों में सूख जाते थे। इसी विचार से संस्था के सदस्यों को स्थायी और प्रतीकात्मक सजावट का विचार आया और डमरू तथा रुद्राक्ष के माध्यम से सजावट की अनूठी पहल शुरू की गई। केदारनाथ धाम को सजाने के बाद अब उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर को सजाया जा रहा है।
संस्था का लक्ष्य भविष्य में देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में इस प्रकार की सनातन यात्रा पहुँचाकर डमरू और रुद्राक्ष से सजावट करना है। उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर इस यात्रा का दूसरा ज्योतिर्लिंग है, जहां यह भव्य सजावट की जा रही है।
नववर्ष 2026 के अवसर पर महाकाल लोक और मंदिर परिसर में की जा रही यह विशेष सजावट श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी और सनातन संस्कृति के प्रति युवाओं की आस्था और समर्पण का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करेगी।
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