स्लीपर कोच बसों पर आरटीओ द्वारा अचानक लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में टूरिस्ट बस ऑपरेटरों ने गुरुवार को सामाजिक न्याय परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान 100 से अधिक स्लीपर कोच बसें परिसर में खड़ी कर दी गईं। टूरिस्ट बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने इस निर्णय को अव्यावहारिक बताते हुए गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।
बस ऑपरेटरों का कहना है कि आरटीओ के इस फैसले से न केवल बस मालिक प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि टूरिस्ट एजेंट, टूर गाइड, ड्राइवर, कंडक्टर और धार्मिक यात्राओं से जुड़े छोटे व्यवसायों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है।
एसोसिएशन के सदस्यों ने आरोप लगाया कि आरटीओ द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के स्लीपर कोच बसों के संचालन पर रोक लगाई गई, जो व्यवसायिक और नैतिक दोनों दृष्टिकोण से उचित नहीं है। हजारों परिवारों की रोज़ी-रोटी इस व्यवसाय से जुड़ी हुई है, वहीं धार्मिक यात्राओं की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
एसोसिएशन सदस्य भावन कालरा ने बताया कि वर्ष 2019 में जिन बसों का 2×2 सीटिंग लेआउट का परीक्षण कर पंजीयन किया गया था, उन्हें अब अचानक 2×1 में संशोधित करने के आदेश दिए जा रहे हैं। उज्जैन जिले में कुल 839 बसों को आरटीओ द्वारा ब्लॉक किया गया है। यदि नियमों के अनुसार बसों में बदलाव किया गया, तो प्रति बस 7 से 10 लाख रुपये तक का खर्च आएगा।
टूरिस्ट बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने परिवहन विभाग एवं प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है, ताकि रोजगार, पर्यटन और धार्मिक यात्राओं की व्यवस्थाएं बाधित न हों। ऑपरेटरों ने कहा कि इस मुद्दे का शीघ्र समाधान आवश्यक है, जिससे व्यवसाय से जुड़े लोगों को राहत मिल सके।
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