राजस्थान में पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर सियासी और प्रशासनिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्य में राजस्थान ओबीसी आयोग की रिपोर्ट अब तक नहीं मिलने के कारण पंचायतीराज चुनाव फिलहाल स्थगित हैं।

इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने सरकार और संबंधित विभाग को चेतावनी जारी की है। सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार पंचायत चुनाव 15 अप्रैल तक कराना अनिवार्य है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा ने पंचायतीराज विभाग को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा में चुनाव नहीं कराए गए और इस पर अदालत द्वारा अवमानना की कार्रवाई होती है, तो इसके लिए संबंधित विभाग के अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

सूत्रों के मुताबिक, ओबीसी आरक्षण वाले वार्डों की सूची अभी तक आयोग को उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसी कारण पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित नहीं किया जा सका है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि यदि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट समय पर नहीं मिलती है, तो चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए आयोग के पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ओबीसी आयोग की रिपोर्ट समय पर आएगी या पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में और देरी होगी। यह मुद्दा अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

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