मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में इस वर्ष गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) को भारतीय संस्कृति, शिक्षा और गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित महर्षि सांदीपनि गुरु पर्व का भव्य आयोजन किया जाएगा। प्रदेशभर के शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और अन्य शिक्षण संस्थानों में गुरु पूजन, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित होंगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ‘भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना’ का शुभारंभ भी करेंगे। योजना के अंतर्गत भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जित 14 विद्याओं, 64 कलाओं तथा भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। प्रतियोगिता में चयनित 102 मेधावी छात्र-छात्राओं को ₹1 लाख की एकमुश्त छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के निदेशक श्रीराम तिवारी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व केवल उनकी लीलाओं और पराक्रम से नहीं, बल्कि महर्षि सांदीपनि के आश्रम में प्राप्त शिक्षा, अनुशासन और संस्कारों से निर्मित हुआ। उन्होंने बताया कि यही गुरु-शिष्य परंपरा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बनी और आगे चलकर उन्हें युगपुरुष के रूप में स्थापित किया।
श्रीराम तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। महर्षि सांदीपनि गुरु पर्व और भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना इसी सोच का परिणाम है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में ज्ञान, संस्कार, राष्ट्रभक्ति, नेतृत्व क्षमता और भारतीय मूल्यों का विकास करना है।श्री तिवारी ने बताया कि इसी उद्देश्य से श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा भगवान श्रीकृष्ण मेधावी छात्रवृत्ति योजना प्रारंभ की जा रही है। योजना के अंतर्गत प्रदेश के 51 विद्यार्थी विद्यालय से एवं 51 विद्यार्थी महाविद्यालय/विश्वविद्यालय से चयन होंगे। जिन्हें श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा राशि रूपये ₹1,00,000 की एकमुश्त छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। प्रतियोगिता भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जित 14 विद्याओं, 64 कलाओं, महर्षि सांदीपनि तथा भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित होगी। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य भारतीय ज्ञान-विज्ञान, कला, संस्कृति, साहित्य, दर्शन और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय चेतना से जोड़ने का अभिनव प्रयास है। उन्होंने प्रदेश के विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं सभी शिक्षण संस्थानों से आग्रह किया कि वे महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व और छात्रवृत्ति योजना में सक्रिय सहभागिता कर इसे जनभागीदारी का सांस्कृतिक अभियान बनाये।
प्रदेश सरकार का मानना है कि यह पहल केवल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और मध्यप्रदेश को भारतीय ज्ञान परंपरा का अग्रणी केंद्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.
इन पुस्तकों का होगा लोकार्पण
तिवारी ने बताया कि गुरूपूर्णिमा के अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री जी डॉ. मोहन यादव द्वारा लिखित पुस्तक भारतीय गुरू परंपरा के शिल्पी महर्षि सांदीपनि, महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा प्रकाशित महर्षि सान्दीपनि श्रीकृष्ण विद्यांजलि तथा जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तक सर्वांग का लोकार्पण भी होगा। इसके साथ ही महर्षि सांदीपनि के जीवन पर केन्द्रित एक ई-बुकलेट प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों को उपलब्ध करायी जा रही है।
श्रीकृष्ण पाथेय न्यास
राष्ट्र में नव जागरण तथा उत्कर्ष के लिये भारत वर्ष और विश्व के पथ प्रदर्शक, युगावतार भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उज्जैन, मध्यप्रदेश को केन्द्र में रख कर की गई यात्रा के विभिन्न स्थलों के पुरान्वेषण तथा उन्हें तीर्थ के रुप में विकसित करने तथा सम्बन्धित क्षेत्रों के साहित्य, संस्कृति का संरक्षण, संवर्धन करने के उद्देश्य से माननीय मुख्यमंत्रीजी की अध्यक्षता एवं माननीय संस्कृति मंत्रीजी की उपाध्यक्षता में मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की स्थापना की गयी।
न्यास के उद्देश्य
मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण की यात्राओं से जुडे स्थलों की पहचान, विकास, संरक्षण तथा उनका अभिलेखन, फोटोग्राफी, फिल्मांकन एवं चित्रांकन ।
इन स्थलों के मंदिरों, जल संरचनाओं, वन संपदा एवं उद्यानों का संरक्षण तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार ।
उज्जैन में 14 विद्याओं एवं 64 कलाओं की औपचारिक शिक्षा हेतु सांदीपनि गुरुकुल की स्थापना।
सभागार, सामुदायिक भवन तथा धर्मशालाओं का निर्माण एवं संचालन ।
शिक्षा, संस्कृति, कृषि तथा गौ एवं पशुधन पालन की विरासत का विकास ।
नई पीढ़ी को भगवान श्रीकृष्ण की कथा एवं यात्रा स्थलों से भावनात्मक तथा अनुभवात्मक रूप से जोड़ना।
पर्यटकों, शोधार्थियों, युवाओं एवं विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय, संग्रहालय तथा सूचना केंद्रों की स्थापना।
उन ऋषियों, संतों, विचारकों, कवियों, लेखकों, कलाकारों एवं वैज्ञानिकों के योगदान का अभिलेखन जिन्होंने श्रीकृष्ण को जगदगुरु के रूप में स्थापित किया।
PUBLICFIRSTNEWS.COM
