HIGHLIGHTS FIRST :
- मस्तूरी के स्कूल में मामला गरमाया, कलेक्टर ने लिया संज्ञान
- सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रधान पाठक को नोटिस, 3 दिन में मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला बेलटुकरी से सामने आए एक मामले ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और संवेदनशीलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बीमार छात्रा से कुर्सी साफ करवाने के आरोप की प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू हो गई है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए बिलासपुर कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर के निर्देश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी, बिलासपुर ने शाला की प्रधान पाठक श्रीमती भारती खांडे को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
क्या है पूरा मामला?
बताया गया है कि 7 सितंबर 2026 को शासकीय प्राथमिक शाला बेलटुकरी से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
वीडियो को लेकर सामने आई शिकायत के अनुसार, एक छात्रा पहले से बुखार से पीड़ित थी। स्कूल में उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे उल्टी हो गई।
आरोप है कि ऐसी स्थिति में छात्रा को तत्काल चिकित्सकीय सहायता अथवा आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराने के बजाय उसी छात्रा से गंदी हुई कुर्सी साफ करवाई गई।
घटना से संबंधित वीडियो वायरल होने के बाद मामला शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के संज्ञान में पहुंचा।
महत्वपूर्ण: छात्रा के साथ वास्तव में क्या हुआ और किसकी क्या भूमिका रही, इसका अंतिम निर्धारण प्रशासनिक जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगा। फिलहाल संबंधित आरोपों की जांच चल रही है।
कलेक्टर ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने शिक्षा विभाग को जांच और नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।
प्रशासन का फोकस इस बात पर है कि वायरल वीडियो और शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है तथा छात्रा के साथ स्कूल परिसर में उस समय क्या परिस्थितियां बनी थीं।
प्रधान पाठक को 3 दिन का नोटिस
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बिलासपुर द्वारा 12 सितंबर 2026 को जारी नोटिस में शासकीय प्राथमिक शाला बेलटुकरी की प्रधान पाठक श्रीमती भारती खांडे से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
नोटिस में कहा गया है कि संबंधित मामले में स्पष्ट, लिखित एवं तथ्यात्मक स्पष्टीकरण कार्यालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
इसके लिए नोटिस प्राप्त होने के तीन दिवस के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होने पर नियमानुसार एकतरफा कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने क्या कहा?
जिला शिक्षा अधिकारी के नोटिस में वायरल वीडियो से संबंधित शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित घटनाक्रम को पदीय कर्तव्यों के विरुद्ध तथा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों के प्रतिकूल बताए जाने का उल्लेख है।
यानी प्रशासन ने मामले को केवल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के तौर पर नहीं छोड़ा, बल्कि संबंधित अधिकारी से औपचारिक जवाब तलब किया है।
अब जांच में क्या-क्या सामने आना जरूरी?
इस मामले में प्रशासनिक जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं—
- छात्रा की तबीयत उस समय कितनी खराब थी?
- क्या स्कूल प्रबंधन को छात्रा के बीमार होने की जानकारी थी?
- उल्टी होने के बाद छात्रा को तत्काल सहायता क्यों नहीं मिली?
- छात्रा से सफाई करवाने का निर्णय किसने लिया?
- क्या स्कूल में प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था उपलब्ध थी?
- क्या छात्रा को अभिभावक अथवा स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की कार्रवाई हुई?
- वायरल वीडियो में दिखाई दे रही घटना का पूरा संदर्भ क्या था?
- स्कूल प्रबंधन और संबंधित कर्मचारियों की उस समय क्या भूमिका थी?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।
बच्चों की सुरक्षा पर प्रशासन का सख्त संदेश
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा मुद्दा केवल एक स्कूल की घटना नहीं, बल्कि स्कूलों में बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और उनकी सुरक्षा का है।
छोटे बच्चे स्कूल में शिक्षकों और स्कूल स्टाफ पर भरोसा करके आते हैं। ऐसे में बीमारी, दुर्घटना या किसी आपात स्थिति में उन्हें डांट या असहज परिस्थिति के बजाय तत्काल सहायता, देखभाल और सुरक्षित वातावरण मिलना जरूरी है।
प्रशासनिक कार्रवाई के जरिए यह संदेश भी सामने आया है कि बच्चों से संबंधित शिकायतों को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
वायरल वीडियो से प्रशासनिक कार्रवाई तक
इस पूरे घटनाक्रम को अगर क्रम में देखें तो तस्वीर कुछ इस तरह बनती है—
7 सितंबर: स्कूल से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
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शिकायत सामने आई
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कलेक्टर ने मामले का संज्ञान लिया
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शिक्षा विभाग को कार्रवाई के निर्देश
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12 सितंबर: जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रधान पाठक को नोटिस
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3 दिन में जवाब तलब
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जवाब असंतोषजनक होने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी
अब नजर जांच की रिपोर्ट पर
फिलहाल इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की शुरुआत हो चुकी है। प्रधान पाठक से जवाब मांगा गया है और जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या थी तथा जिम्मेदारी किसकी बनती है।
लेकिन इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल जरूर सामने ला दिया है कि स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं हैं—वे बच्चों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद स्थान भी होने चाहिए।
बच्चा बीमार हो तो पहला कर्तव्य—इलाज और देखभाल, न कि उससे काम करवाना।
अब सभी की नजर तीन दिन में दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और उसके बाद प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर रहेगी।
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