HIGHLIGHT :

  • धार्मिक आस्था के साथ रोज़गार का केंद्र
  • 10,000 से अधिक परिवारों को सीधा-परोक्स लाभ
  • महिलाओं को ₹500 से ₹2000 की दैनिक आय
  • होटल, लॉज, टैक्सी, होम-स्टे से आर्थिक समृद्धि
  • भंडारा और जल्द खुलने वाला चिकित्सालय

बुंदेलखंड के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम आज सिर्फ एक धार्मिक तीर्थ नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की आजीविका का सशक्त केंद्र बन चुका है। यहां आने वाले लाखों श्रद्धालु न केवल अपनी आस्था और विश्वास लेकर आते हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोज़गार और व्यवसाय के नए रास्ते भी खोलते हैं।

रोज़गार के साधनों में उछाल

धाम परिसर और आसपास के इलाके में होटल, होम-स्टे, गेस्ट हाउस, मिष्ठान भंडार, रेस्टोरेंट, टैक्सी-ऑटो सेवा, फूल-माला, महावर, स्नैक्स, फल-फूल और कई घरेलू उद्योग तेजी से बढ़े हैं। छतरपुर और पन्ना जिलों के ढाबे और होटल भी तीर्थयात्रियों की वजह से समृद्ध हो रहे हैं।

करीब 500 से 600 टैक्सी और ऑटो चालकों के परिवार धाम से जुड़ी परिवहन सेवाओं पर निर्भर हैं।

महिला सशक्तिकरण की मिसाल

पास के गांवों की सैकड़ों महिलाएं यहां वस्त्र, महावर, फूल-माला, फल-फूल, चना, स्नैक्स बेचकर ₹500 से ₹2000 तक की दैनिक आय अर्जित कर रही हैं। पहले घरेलू कामकाज में सीमित रहने वाली महिलाएं अब अपने परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं।

अन्नपूर्णा और आरोग्य की सेवा

धाम परिसर में प्रतिदिन निशुल्क भंडारा चलता है, जहां गरीबों और श्रद्धालुओं को सुपाच्य भोजन उपलब्ध कराया जाता है। जल्द ही यहां एक चिकित्सालय भी शुरू होने वाला है, जहां नि:शुल्क इलाज और स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।

आर्थिक असर

धाम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 10,000 परिवारों को रोजगार मिला है। पहले रोज़गार की तलाश में पलायन करने वाले बुंदेलखंड के लोग अब अपने घर पर ही आजीविका पा रहे हैं।

स्थानीयों की राय

“बागेश्वर धाम ने हमारी किस्मत बदल दी,” – यह कहना है उन महिलाओं का, जो अब अपने बच्चों की पढ़ाई, शादी और घर के निर्माण में आर्थिक रूप से सक्षम हो गई हैं।

publicfirstnews.com

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