बम्होरी स्थित शासकीय अस्पताल पर आसपास के लगभग 60 गांवों की आबादी निर्भर है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि यहां न तो स्थायी डॉक्टर पदस्थ हैं और न ही पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मी। इलाज के अभाव में ग्रामीणों को मजबूरी में सिलवानी, रायसेन और भोपाल जैसे दूरस्थ शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और धन की भारी बर्बादी के साथ कई बार जान तक चली जाती है।

हाल ही में इसी अस्पताल में समय पर इलाज न मिलने के कारण राठी परिवार के एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश फैल गया और ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया।

शनिवार से कस्बे के नागरिकों और ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन नगर बंद का ऐलान कर दिया, जिसके चलते पूरा बाजार पूरी तरह बंद रहा। संघर्ष समिति के सदस्यों ने एक दिन पहले SDM को ज्ञापन सौंपकर डॉक्टर की तत्काल नियुक्ति और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं बहाल करने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर आंदोलन और तेज हो गया।

आंदोलनकारियों का साफ कहना है —
“डॉक्टर नहीं तो काम नहीं।”

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति और स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं की गईं, तो सड़क जाम, धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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