देशभर के हजारों छोटे निवेशकों की गाढ़ी कमाई से जुड़ा एक बड़ा कथित फिनटेक घोटाला अब सामने आ रहा है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने PYYPL नाम की फिनटेक कंपनी से जुड़े नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और पंजाब में कई ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह मामला ऑनलाइन निवेश और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर कथित धोखाधड़ी से जुड़ा बताया जा रहा है।
आरोप है कि सोशल मीडिया, मोबाइल ऐप और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को कम निवेश में ज्यादा मुनाफे का लालच दिया गया। इसके बाद निवेशकों से जुटाई गई रकम को अलग-अलग बैंकिंग चैनलों और कथित शेल कंपनियों के जरिए इधर-उधर घुमाया गया।
CBI ने इस मामले में CA अशोक शर्मा को गिरफ्तार किया है, जिन पर 900 करोड़ रुपये से ज्यादा की कथित धोखाधड़ी का आरोप बताया जा रहा है। लेकिन इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है।
आखिर ऐसी कंपनियां सालों तक लोगों को जाल में फंसाती रहती हैं और हजारों करोड़ का नुकसान होने के बाद ही जांच एजेंसियां क्यों जागती हैं? क्या ऐसे मामलों में निगरानी रखने वाली सरकारी एजेंसियों और विभागों की जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए?
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