Close Menu
Public First News
  • Bharat first
  • Crime first
  • Politics first
  • Education first
  • Panchayat first
  • Sanatan first
  • Sanskriti first
  • Youth first
  • Live Tv

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot
Kisan first By Public First News

#KISAN FIRST | भोपाल में भारतीय किसान संघ की बड़ी बैठक, ई-टोकन और खाद वितरण पर 9 अहम मुद्दों पर मंथन |

May 28, 2026 Kisan first
MP FIRST By Public First News

#MP FIRST | इंदौर से उज्जैन तक बस से पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, अधिकारियों संग किया विकास कार्यों पर मंथन

May 28, 2026 MP FIRST
MP FIRST By Public First News

#MP FIRST | मध्यप्रदेश शासन के मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने गुरूवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं से किया संवाद |

May 28, 2026 MP FIRST
Advertisement
Facebook X (Twitter) Instagram
Friday, May 29
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube RSS
Public First News
Breaking News:
  • #KISAN FIRST | भोपाल में भारतीय किसान संघ की बड़ी बैठक, ई-टोकन और खाद वितरण पर 9 अहम मुद्दों पर मंथन |
  • #MP FIRST | इंदौर से उज्जैन तक बस से पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, अधिकारियों संग किया विकास कार्यों पर मंथन
  • #MP FIRST | मध्यप्रदेश शासन के मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने गुरूवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं से किया संवाद |
  • #CG FIRST | लोक निर्माण विभाग के सचिव ने सड़कों का काम देखा , अधिकारियों की बैठक लेकर काम में तेजी लाने के दिए निर्देश |
  • #MP FIRST | महिला सशक्तिकरण पर कृष्णा गौर का बयान: मोहन सरकार को बताया ‘वरदान’ – राकेश शर्मा |
  • #MP FIRST | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से सौजन्य भेंट |
  • #CG FIRST | राजनांदगांव रेलवे स्टेशन पर पुलिस, RPF और GRP की संयुक्त मॉक ड्रिल, आपात स्थिति से निपटने का किया अभ्यास |
  • #MP FIRST | उज्जैन में खूनी संघर्ष: 18 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या, CCTV आया सामने
  • #CG FIRST | सजग कोरबा, सतर्क कोरबा : कटघोरा में पुलिस का सख्त वाहन चेकिंग अभियान |
  • #CG FIRST | वनांचल के बेटे ने बढ़ाया प्रदेश का मान, आईएफएस बनकर रचा नया इतिहास |
Login
  • Bharat first
  • Crime first
  • Politics first
  • Education first
  • Panchayat first
  • Sanatan first
  • Sanskriti first
  • Youth first
  • Live Tv
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube RSS
Public First News
Home»Sanatan first»SATYA DARSHAN»#SATYA DARSHAN | “सबसे बड़ा धंधा वो है — जिसमें बीमारी भी आपकी बेचो और दवाई भी।”
SATYA DARSHAN

#SATYA DARSHAN | “सबसे बड़ा धंधा वो है — जिसमें बीमारी भी आपकी बेचो और दवाई भी।”

पब्लिक फर्स्ट | सत्य दर्शन | आशुतोष
Public First NewsBy Public First NewsMay 8, 2026No Comments0 Views
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram Tumblr Email
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

शुरुआत से पहले — एक सवाल जो आपको सोचने पर मजबूर कर दे

आपके दादा-परदादा की पीढ़ी में कितने लोग मधुमेह यानी डायबिटीज़ से पीड़ित थे?
कितने कैंसर से?
कितने उच्च रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर से?
जवाब आप जानते हैं।

वो पीढ़ी जिसके पास न एमआरआई था, न कीमोथेरेपी, न महंगी दवाइयाँ — वो हमसे कहीं ज़्यादा स्वस्थ थी।
क्यों?

यही सवाल इस पूरे लेख की नींव है।

और इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमें 150 साल पीछे जाना होगा। उस एक दिन तक — जब ज़मीन से एक काला तरल पदार्थ निकला और दुनिया हमेशा के लिए बदल गई।

भाग एक: वो दुनिया जो थी — जब दवाई प्रकृति में थी

हज़ारों साल तक मानवता ने प्रकृति से इलाज किया।

भारत: आयुर्वेद — चरक संहिता और सुश्रुत संहिता। 5 हज़ार साल पुरानी चिकित्सा पद्धति। परखी हुई, प्रमाणित, पीढ़ी-दर-पीढ़ी विकसित।

यूनान: हिपोक्रेटस — जिन्हें “चिकित्सा का जनक” कहा जाता है। उन्होंने कहा था:

“भोजन को दवाई बनाओ और दवाई को भोजन।”

अरब: इब्न सीना की “कानून-उल-तिब” — सन् 1025 में लिखी गई। 17वीं सदी तक यूरोप के चिकित्सा विद्यालयों में पढ़ाई जाती थी।

चीन: 3 हज़ार साल पुरानी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति।

इन सबमें एक बात समान थी। दवाई सुलभ थी। सस्ती थी। स्थानीय थी।

नीम, हल्दी, अश्वगंधा, त्रिफला, अदरक, तुलसी — ये सब हर घर में थे।
इन पर कोई पेटेंट नहीं था।
इसीलिए इन पर कोई मुनाफ़ा नहीं था।

और इसीलिए — इन्हें खत्म करना ज़रूरी था।

भाग दो: सन् 1859 — वो एक दिन जिसने दुनिया बदल दी

पेंसिल्वेनिया, अमेरिका। 27 अगस्त, 1859।

एडविन ड्रेक नाम के एक व्यक्ति ने पहला व्यावसायिक तेल का कुआँ खोदा।

उस दिन से पहले की दुनिया:
ऊर्जा लकड़ी और कोयले से मिलती थी। दवाई जड़ी-बूटियों से। अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी थी। समाज प्रकृति से जुड़ा था।

उस दिन के बाद:
पेट्रोलियम निकला। और उसके साथ निकली एक नई सोच — “इससे सिर्फ ईंधन नहीं बनेगा। इससे सब कुछ बनेगा।”
यह सोच किसकी थी?

एक आदमी की — जिसका नाम था जॉन डेविडसन रॉकफेलर।

भाग तीन: रॉकफेलर — वो आदमी जिसने दुनिया का चिकित्सा तंत्र खरीद लिया

जॉन डेविडसन रॉकफेलर।

सन् 1870 में स्टैंडर्ड ऑयल की स्थापना।

सन् 1880 तक अमेरिका के 90 प्रतिशत तेल शोधन यानी रिफाइनिंग पर उनका नियंत्रण।
तेल शोधन के बाद बचता था: कोल टार।
गाढ़ा, काला, बदबूदार अपशिष्ट।

रासायनिक शोधकर्ताओं ने पाया कि कोल टार से कृत्रिम यानी सिंथेटिक यौगिक बन सकते हैं। इन यौगिकों से रंग बनते हैं। और इन्हीं से कुछ ऐसे रसायन बनते हैं जो जीवाणुओं को मार सकते हैं।

रॉकफेलर ने देखा: तेल से जो “कचरा” निकलता है — उसे “दवाई” बनाकर बेचा जा सकता है।

यही वो अंतर्दृष्टि थी जिसने आधुनिक दवा उद्योग की नींव रखी।

व्यावसायिक तर्क सीधा था:
तेल बेचो — मुनाफ़ा।

तेल के उपोत्पाद से कृत्रिम दवाएँ बनाओ — और मुनाफ़ा।
उन दवाओं पर पेटेंट करो — एकाधिकार।
एकाधिकार से असीमित मुनाफ़ा।

लेकिन एक समस्या थी।
लोग तो पहले से नीम और हल्दी से ठीक हो रहे थे।

उन्हें कृत्रिम दवाएँ क्यों खरीदनी पड़ेंगी?

इसका समाधान निकाला: पूरे चिकित्सा तंत्र को खरीद लो।

भाग चार: सन् 1910 — फ्लेक्सनर रिपोर्ट: ज्ञान की सुनियोजित हत्या

यह आधुनिक इतिहास का सबसे कम चर्चित और सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है।
रॉकफेलर और कार्नेगी फाउंडेशन ने अब्राहम फ्लेक्सनर को काम पर रखा।
काम था: अमेरिका और कनाडा के सभी चिकित्सा विद्यालयों का “निरीक्षण।”

रिपोर्ट के निष्कर्ष:
सिर्फ वही चिकित्सा “वैध विज्ञान” है जो पेट्रोरासायनिक कृत्रिम दवाओं पर आधारित हो, प्रयोगशाला में मापी जा सके और जीवाणु सिद्धांत को माने।

बाकी सब: “झोलाछाप।” “अवैज्ञानिक।” “खतरनाक।”

परिणाम — सन् 1910 से 1935 के बीच:

चिकित्सा विद्यालय: 162 से घटकर 31 ।
होम्योपैथी विद्यालय: 22 से घटकर 2।
वनस्पति चिकित्सा विद्यालय: पूरी तरह बंद।
प्राकृतिक चिकित्सा: बंद।

आयुर्वेद, पारंपरिक चिकित्सा: “आदिम” घोषित।
तंत्र क्या था?
प्रतिबंध नहीं लगाया।

बस रॉकफेलर और कार्नेगी फाउंडेशन ने “स्वीकृत” विद्यालयों को करोड़ों डॉलर की अनुदान राशि दी। बाकी को कुछ नहीं। बिना धन के वो स्वयं बंद हो गए।

यह बंदूक से नहीं — पैसे से की गई हत्या थी।

असली कारण एक पंक्ति में:

नीम पर पेटेंट नहीं होता। हल्दी पर पेटेंट नहीं होता। कृत्रिम दवा पर पेटेंट होता है। पेटेंट मतलब एकाधिकार। एकाधिकार मतलब असीमित मुनाफ़ा।

इसीलिए हज़ारों साल का ज्ञान “अवैज्ञानिक” हो गया।
इसीलिए पेट्रोलियम का कचरा “आधुनिक चिकित्सा” बन गया।

भाग पाँच: चिकित्सा तंत्र कैसे बदला — एक कालक्रम

सन् 1847: अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन की स्थापना

यह संस्था आधिकारिक तौर पर चिकित्सकों के मानक तय करने के लिए बनाई गई थी।
लेकिन फ्लेक्सनर रिपोर्ट के बाद इसका असली काम बदल गया।

एएमए ने “फार्मेसी और रसायन परिषद” बनाई जो तय करती थी कि कौन सी दवा “स्वीकृत” है।
दवा कंपनियों को स्वीकृति के लिए एएमए की पत्रिकाओं में विज्ञापन देना पड़ता था।
यानी जो कंपनी एएमए को पैसे दे — उसकी दवा स्वीकृत।
यह प्रलेखित हितों का टकराव था।

सन् 1910 से 1930: पेट्रोरसायन चिकित्सा का वर्चस्व
बेयर कंपनी ने एस्पिरिन सन् 1897 में कोल टार से बनाई थी।

उसी बेयर ने सन् 1898 में हेरोइन बनाई — खाँसी की “सुरक्षित दवा” के रूप में बेची।
अब इसी मॉडल पर हर बीमारी के लिए पेट्रोरासायनिक दवा बनाई जाने लगी।

सन् 1925: आईजी फार्बेन — इतिहास की सबसे खतरनाक कंपनी
बेयर, बीएएसएफ, होएचस्ट और तीन अन्य कंपनियाँ मिलकर बनी आईजी फार्बेन।

एक साथ: दवा कंपनी, रासायनिक कंपनी, हथियार निर्माता।
और उनका अमेरिकी साझेदार: स्टैंडर्ड ऑयल यानी रॉकफेलर।

दोनों ने एक गुप्त करार किया जिसमें तेल रसायन की तकनीक साझा करने और बाज़ार आपस में बाँटने पर सहमति हुई।
यह करार सन् 1942 में अमेरिकी सीनेट की जाँच में सामने आया।
सीनेटर हैरी ट्रूमन — जो बाद में राष्ट्रपति बने — ने इसे “देशद्रोह” कहा। किसी की सज़ा नहीं हुई।

भाग छह: बीमारियाँ — दवाएँ — मुनाफ़ा: वो कालक्रम जो सब कहता है

सन् 1918: स्पेनिश फ्लू

बीमारी: इन्फ्लूएंज़ा महामारी। 510 करोड़ मौतें।

इलाज: बेयर की एस्पिरिन बड़े पैमाने पर दी गई।

सच्चाई: सन् 2009 में प्रकाशित शोध — जर्नल क्लिनिकल इन्फेक्शियस डिज़ीज़ेज़ — के अनुसार उस दौर में दी गई एस्पिरिन की मात्रा विषाक्त थी। कई मौतें एस्पिरिन की अधिक मात्रा से हुईं।

सबक: पहली “आधुनिक महामारी” में दवा उद्योग ने अपना पहला बड़ा बाज़ार पाया।

सन् 1950 से 1960 का दशक: पोलियो

बीमारी: पोलियोमाइलाइटिस। बच्चों में लकवे का भय।

दवा और टीका: जोनास साल्क का टीका — सन् 1955।

कंपनी: एली लिली, पार्क-डेविस।

अनुमानित मुनाफ़ा: करोड़ों डॉलर। सरकारी खरीद से।

एक तथ्य जो कम बताया जाता है:

सन् 1955 में कटर लेबोरेटरीज़ का टीका दोषपूर्ण निकला। इससे 200 बच्चों में पोलियो हुआ और 11 की मौत हुई। यह “कटर घटना” के नाम से दर्ज है। फिर भी टीकाकरण कार्यक्रम चलता रहा।

सन् 1976: स्वाइन फ्लू — अमेरिका

बीमारी: एच-वन-एन-वन इन्फ्लूएंज़ा।

सरकारी निर्णय: 4 करोड़ अमेरिकियों को टीका।

टीके से नुकसान: 450 लोगों में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम। 25 मौतें।

कंपनियाँ: मेरेल, पार्क-डेविस, फाइज़र, वायथ।

कार्यक्रम बंद करना पड़ा। कंपनियों को पूरा भुगतान मिला।
यह पहली बार था जब दवा कंपनियों ने सरकार से कानूनी सुरक्षा माँगी — और मिली।

सन् 1981: एचआईवी और एड्स

बीमारी: एचआईवी वायरस से एड्स।
दवा: एज़ेडटी — एज़िडोथाइमिडीन।
कंपनी: बरोज़ वेलकम — आज ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन।
सच्चाई: एज़ेडटी पहले कैंसर के लिए बनाई गई थी। इतनी विषाक्त थी कि वहाँ असफल रही। एड्स के लिए बिना पूर्ण परीक्षण के स्वीकृत की गई।

दुष्प्रभाव: अस्थि मज्जा यानी बोन मैरो का नष्ट होना, अंग विफलता।
सन् 1987 में वार्षिक लागत: 10,000 डॉलर प्रति मरीज़।

अनुमानित मुनाफ़ा: अरबों डॉलर।
एंथनी फाउची ने इस दवा की त्वरित स्वीकृति में भूमिका निभाई — यह प्रलेखित है।

सन् 1993: स्टेटिन दवाएँ और कोलेस्ट्रॉल का खेल

बीमारी: उच्च कोलेस्ट्रॉल — एक नई “बीमारी” जो इससे पहले इतनी चर्चा में नहीं थी।
दवाएँ: लवास्टेटिन, सिम्वास्टेटिन, एटोर्वास्टेटिन।
कंपनियाँ: मर्क, फाइज़र — लिपिटर।

अनुमानित मुनाफ़ा: लिपिटर अकेली — इतिहास की सबसे ज़्यादा बिकने वाली दवा। 132 अरब डॉलर — 30 वर्षों में।

सच्चाई: कोलेस्ट्रॉल के मानक समय-समय पर इस तरह बदले गए जिससे अधिक से अधिक लोग “बीमार” श्रेणी में आ गए। अमेरिकी हृदय संस्था के जिन विशेषज्ञों ने ये मानक बदले — उनमें से कई का दवा कंपनियों से वित्तीय संबंध था।
यह ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित शोध में दर्ज है।

सन् 1997: एंटीडिप्रेसेंट और मानसिक स्वास्थ्य का बाज़ार

बीमारी: अवसाद, चिंता, मानसिक विकार।
दवाएँ: प्रोज़ैक, ज़ोलोफ्ट, पैक्सिल।

कंपनियाँ: एली लिली, फाइज़र, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन।
अनुमानित मुनाफ़ा: वैश्विक एंटीडिप्रेसेंट बाज़ार — 20 अरब डॉलर से अधिक वार्षिक।

सच्चाई: सन् 2008 में जर्नल पीएलओएस मेडिसिन में प्रकाशित शोध — जिसमें एफडीए के अप्रकाशित परीक्षणों का विश्लेषण किया गया — ने पाया कि इन दवाओं का प्लेसबो यानी खाली गोली से कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं है। हल्के से मध्यम अवसाद में।
फिर भी ये दवाएँ दुनिया की सबसे ज़्यादा बिकने वाली दवाओं में हैं।

सन् 2009: स्वाइन फ्लू — वैश्विक महामारी
बीमारी: एच-वन-एन-वन इन्फ्लूएंज़ा — नया स्ट्रेन।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का निर्णय: महामारी का सर्वोच्च स्तर घोषित।
दवा: टेमीफ्लू — रोश कंपनी। टीके — विभिन्न कंपनियाँ।
अनुमानित मुनाफ़ा: टेमीफ्लू से रोश को एक अरब 80 करोड़ डॉलर।
सच्चाई:

सन् 2010 में यूरोपीय संसद की जाँच में पाया गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख सलाहकारों के दवा कंपनियों से वित्तीय संबंध थे।
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ने सन् 2012 में खुलासा किया कि रोश ने टेमीफ्लू के नैदानिक परीक्षण का पूरा डेटा छुपाया था।
“झूठी महामारी” — यह शब्द कुछ यूरोपीय अधिकारियों ने प्रयोग किए।

सन् 2020 से 2023: कोविड-19— दवा उद्योग का सबसे बड़ा वर्ष

बीमारी: कोरोनावायरस — कोविड-19।

टीके और दवाएँ:

फाइज़र-बायोएनटेक: एमआरएनए टीका।
मॉडर्ना: एमआरएनए टीका।
एस्ट्राज़ेनेका: वायरल वेक्टर टीका।
जॉनसन एंड जॉनसन: वायरल वेक्टर टीका।

अनुमानित मुनाफ़ा:

फाइज़र: 36 अरब 80 करोड़ डॉलर — सिर्फ सन् 2021 में।
मॉडर्ना: 18 अरब 40 करोड़ डॉलर — सन् 2021 में।

मॉडर्ना के पास इससे पहले कोई स्वीकृत उत्पाद नहीं था।
दोनों को दी गई: पूर्ण कानूनी सुरक्षा। यानी टीके से नुकसान हो तो कंपनी पर मुकदमा नहीं।

फाइज़र के आंतरिक दस्तावेज़:

न्यायालय के आदेश से सन् 2022 में जारी हुए।
इनमें 1200 इक्यानवे दुष्प्रभावों की सूची थी।
फाइज़र चाहती थी कि यह डेटा 75 वर्षों तक गोपनीय रहे।

एस्ट्राज़ेनेका — सन् 2024:

ब्रिटिश उच्च न्यायालय में माना: टीके से थ्रोम्बोसिस विद थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम हो सकता है। यह एक गंभीर रक्त के थक्के जमने की स्थिति है।

आइवरमेक्टिन:
पेटेंट-मुक्त सस्ती दवा। कई देशों के चिकित्सकों ने सकारात्मक परिणाम बताए।
व्यवस्थित रूप से नकारा गया।
कारण: 1 रुपये की दवाई से हज़ारों करोड़ का टीका बाज़ार खत्म हो जाता।

भाग सात: बीमारी पैदा करो — दवाई बेचो: वो चक्र जो आज भी चल रहा है

पेट्रोरासायनिक उर्वरक:

1940 के बाद हरित क्रांति।
रासायनिक उर्वरक — पेट्रोलियम आधारित।
कीटनाशक — पेट्रोलियम आधारित।
खरपतवार नाशक जैसे राउंडअप और ग्लाइफोसेट — मोनसेंटो — पेट्रोलियम आधारित।

ग्लाइफोसेट:
विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर शोध एजेंसी आईएआरसी ने सन् 2015 में वर्गीकृत किया: “संभवतः मनुष्यों में कैंसरकारी।”
यह विश्व स्वास्थ्य संगठन का खुद का निष्कर्ष है।
मोनसेंटो के आंतरिक दस्तावेज़ — जो न्यायालय में जारी हुए — दिखाते हैं कि कंपनी को पता था और उसने छुपाया।

सूक्ष्म प्लास्टिक यानी माइक्रोप्लास्टिक:
नेचर मेडिसिन पत्रिका — मार्च 2024:

धमनियों की दीवारों में सूक्ष्म प्लास्टिक मिले। जिन मरीज़ों में सूक्ष्म प्लास्टिक थे उनमें हृदयाघात, मस्तिष्काघात और मृत्यु का खतरा साढ़े चार गुना अधिक।

विश्व स्वास्थ्य संगठन — सन् 2023:

सूक्ष्म प्लास्टिक मानव रक्त, माँ के दूध, फेफड़ों, जिगर और गुर्दों में मिले।
हम पेट्रोलियम प्लास्टिक खा रहे हैं। पी रहे हैं। साँस ले रहे हैं।
अतिप्रसंस्कृत भोजन:
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित शोध: अतिप्रसंस्कृत भोजन 32 विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा।

यानी:
पेट्रोलियम आधारित उर्वरकों से उगाया भोजन।
पेट्रोलियम आधारित पैकेजिंग में बंद।
पेट्रोलियम आधारित योजकों के साथ।
यह भोजन शरीर में सूजन पैदा करता है।

सूजन: मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर, प्रतिरक्षा विकार — सब की जड़।
और फिर:

उसी पेट्रोलियम से बनी कृत्रिम दवाएँ — सूजन “नियंत्रित” करने के लिए।

बीमारी पेट्रोलियम से। दवाई पेट्रोलियम से।
एक ही स्रोत। दोनों तरफ मुनाफ़ा।
यह चक्र है। सुनियोजित चक्र।

भाग आठ: वो परिवार जो इस तंत्र को चलाते हैं

यहाँ सिर्फ प्रलेखित तथ्य।
रॉकफेलर परिवार
तेल से बैंकिंग से दवा से शिक्षा से विदेश नीति।
स्टैंडर्ड ऑयल, चेज़ मैनहटन बैंक जो आज जेपीमॉर्गन चेज़ है, रॉकफेलर फाउंडेशन, शिकागो विश्वविद्यालय और जॉन्स हॉपकिन्स को अनुदान, विदेश संबंध परिषद के संस्थापक, विश्व स्वास्थ्य संगठन और संयुक्त राष्ट्र के शुरुआती प्रायोजक।

एक परिवार। कई उद्योग। एक लक्ष्य।
रोथचाइल्ड परिवार

अठारहवीं सदी से यूरोपीय बैंकिंग।

मेयर एमशेल रोथचाइल्ड ने 5 बेटों को 5 देशों में भेजा — फ्रैंकफर्ट, लंदन, पेरिस, वियना, नेपल्स।
यह पहला अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क था।
नेथन रोथचाइल्ड ने वाटरलू के युद्ध का परिणाम पहले जाना और बाज़ार में अकल्पनीय संपत्ति बनाई — यह प्रलेखित ऐतिहासिक तथ्य है।

मॉर्गन परिवार

जेपी मॉर्गन — अमेरिकी बैंकिंग का आधार।
1907 के बैंकिंग संकट में जेपी मॉर्गन ने व्यक्तिगत रूप से तय किया:
कौन सा बैंक बचेगा, कौन डूबेगा।
एक निजी नागरिक ने अमेरिका की मौद्रिक नीति तय की।
फेडरल रिज़र्व बनाने में प्रलेखित भूमिका।

कार्नेगी परिवार

कार्नेगी फाउंडेशन ने रॉकफेलर के साथ फ्लेक्सनर रिपोर्ट को वित्त पोषित किया।
अमेरिकी शिक्षा तंत्र को आकार दिया।
वारबर्ग परिवार

पॉल वारबर्ग ने फेडरल रिज़र्व का खाका बनाया — जेकिल आइलैंड बैठक, सन् 1910।
मैक्स वारबर्ग जर्मनी में। पॉल वारबर्ग अमेरिका में।

प्रथम विश्व युद्ध में दोनों पक्षों के वित्तीय नेटवर्क इन्हीं से जुड़े थे।
एंटनी सटन की प्रलेखित शोध।

बुश परिवार

प्रेस्कॉट बुश — यूनियन बैंकिंग कॉर्पोरेशन।
नाज़ी जर्मनी की औद्योगिक संपत्तियाँ प्रबंधित कीं।

1942 में अमेरिकी सरकार ने “शत्रु के साथ व्यापार अधिनियम” के तहत उनकी संपत्तियाँ ज़ब्त कीं।
यह अमेरिकी राष्ट्रीय अभिलेखागार में दर्ज है।

इन सबमें समान:

विदेश संबंध परिषद — सन् 1921 — रॉकफेलर द्वारा वित्त पोषित। अमेरिकी विदेश नीति की असली दिशा।
त्रिपक्षीय आयोग — सन् 1973 — डेविड रॉकफेलर। उत्तरी अमेरिका, यूरोप और जापान के अभिजात वर्ग।
बिल्डरबर्ग समूह — सन् 1954 से। वार्षिक गुप्त बैठक। कोई प्रेस नहीं। कोई कार्यवृत्त नहीं।

विश्व आर्थिक मंच — क्लॉस श्वाब। “महान पुनर्निर्धारण।”

यह गुप्त संगठन नहीं हैं।
यह प्रलेखित संगठन हैं।
जिनके सदस्य सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध हैं।
जो खुलेआम मिलते हैं।
लेकिन जिनके निर्णय सार्वजनिक रूप से नहीं बताए जाते।

भाग नौ: जाल कैसे फैला — चरण-दर-चरण

पहला चरण: चिकित्सा शिक्षा खरीदो
फ्लेक्सनर रिपोर्ट के बाद “स्वीकृत” पाठ्यक्रम।
चिकित्सक वही पढ़े जो दवा उद्योग चाहे। चिकित्सक वही लिखे जो दवा उद्योग बनाए।

दूसरा चरण: नियामक संस्थाओं पर कब्ज़ा करो

अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए:

एफडीए के अधिकारी सेवानिवृत्त होकर दवा कंपनियाँ जॉइन करते हैं।
दवा कंपनियों के कार्यकारी एफडीए में आते हैं।

इसे “घूमता दरवाज़ा” कहते हैं।
प्रलेखित उदाहरण
:

स्कॉट गॉटलिब: एफडीए आयुक्त — फिर फाइज़र बोर्ड।
जूली गर्बर्डिंग: सीडीसी निदेशक — फिर मर्क की टीका प्रभाग प्रमुख।
तीसरा चरण: शोध को वित्त पोषित करो और नियंत्रित करो
जो शोध को पैसे दे — वो परिणाम को प्रभावित करे।

हार्वर्ड, ऑक्सफ़ोर्ड, जॉन्स हॉपकिन्स को गेट्स फाउंडेशन, रॉकफेलर फाउंडेशन और दवा कंपनियाँ वित्त पोषित करती हैं।
मार्सिया ऐंजेल — हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की पूर्व प्राध्यापक और न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की पूर्व प्रधान संपादक:
“प्रकाशित नैदानिक शोध का अधिकांश हिस्सा अब विश्वसनीय नहीं रहा।”

यह एक अंदरूनी व्यक्ति का कथन है।

चौथा चरण: मीडिया को नियंत्रित करो

सन् 1917 में अमेरिकी संसद के रिकॉर्ड में कांग्रेसमैन ऑस्कर कैलोवे का वक्तव्य दर्ज है कि जेपी मॉर्गन ने अमेरिका के 25 सबसे बड़े समाचार पत्रों की संपादकीय नीति को प्रभावित करने का काम किया।
सन् 2023 में अमेरिका में 6 निगम पूरे मीडिया को नियंत्रित करते हैं।
इन सबके प्रमुख शेयरधारक: ब्लैकरॉक और वैनगार्ड। वही ब्लैकरॉक और वैनगार्ड जो प्रमुख दवा कंपनियों के भी शीर्ष शेयरधारक हैं।

पाँचवाँ चरण: सरकारों को वित्त पोषित करो

अमेरिका में दवा उद्योग सबसे बड़ा पैरवी उद्योग है। रक्षा उद्योग से भी बड़ा।

सन् 2020 में दवा पैरवी: 30 करोड़ 60 लाख डॉलर। सिर्फ एक साल।

छठा चरण: अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को नियंत्रित करो
विश्व स्वास्थ्य संगठन के शीर्ष दाता: सरकारें और बिल एवं मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन।
गेट्स फाउंडेशन दवा कंपनियों में भारी निवेश करती है।

जो विश्व स्वास्थ्य संगठन को पैसे दे — वो नीति को प्रभावित करे।
यह तर्क है। यह प्रलेखित हितों का टकराव है।

भाग दस: भारत पर विशेष प्रभाव

औपनिवेशिक विरासत:

ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत का व्यवस्थित दोहन किया।
कोलंबिया विश्वविद्यालय की शोधकर्ता उत्सा पटनायक के अनुसार: 45 खरब डॉलर — आज के मूल्यों में।

आयुर्वेद को हाशिये पर धकेला:

ब्रिटिश चिकित्सा सेवा ने आयुर्वेद को “आदिम” घोषित किया।
भारतीय चिकित्सा संघ सन् 1928 में ब्रिटिश मॉडल पर बनी।

आज: स्वास्थ्य मंत्रालय का बजट लाखों करोड़। आयुष का बजट तुलना में नगण्य।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान:
भारत के प्रमुख चिकित्सा संस्थान की स्थापना में रॉकफेलर फाउंडेशन की तकनीकी और वित्तीय सहायता — प्रलेखित।
यानी भारत का सर्वोच्च चिकित्सा महाविद्यालय — उसी रॉकफेलर मॉडल पर जिसने प्राकृतिक चिकित्सा को खत्म किया।

किसान:

बीटी कॉटन — मोनसेंटो जो अब बेयर है।
हर साल बीज खरीदने की बाध्यता। लागत बढ़ी।

सन् 1991 के बाद: 3 लाख से अधिक किसान आत्महत्याएँ। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो का डेटा।

सन् 2005 : पेटेंट अधिनियम

विश्व व्यापार संगठन के दबाव से।
जेनेरिक दवाएँ महंगी हुईं। भारत के जेनेरिक दवा उद्योग पर दबाव।

कोविड में भारत:

कोवैक्सिन: चरण तीन डेटा से पहले स्वीकृति।
कोविशील्ड: एस्ट्राज़ेनेका ने सन् दो हज़ार चौबीस में न्यायालय में गंभीर दुष्प्रभाव माने।
आइवरमेक्टिन: कुछ राज्यों में सकारात्मक परिणाम।
राष्ट्रीय स्तर पर नहीं अपनाया गया।
कारण वही: पेटेंट-मुक्त, सस्ती दवा।

भाग ग्यारह: इस तंत्र को कोई क्यों नहीं तोड़ पाया?

पहला कारण: वो हर संस्था में हैं
नियामक, विश्वविद्यालय, मीडिया, सरकारें — सब में।
जब आप हर जगह हों — तो चुनौती कौन दे?

दूसरा कारण: जिसने कोशिश की — उसके साथ क्या हुआ

मोहम्मद मोसादेग़ — ईरान: तेल राष्ट्रीयकरण। सीआईए तख्तापलट।
सल्वाडोर अलेन्दे — चिली: तांबे का राष्ट्रीयकरण। सीआईए तख्तापलट।
मुअम्मर गद्दाफ़ी — लीबिया: डॉलर-मुक्त अफ्रीकी मुद्रा। नाटो हस्तक्षेप। हत्या।

सूचना देने वाले:

एडवर्ड स्नोडेन: रूस में निर्वासन।
जूलियन असांजे: जेल।

करेन सिल्कवुड — परमाणु उद्योग की सूचनाकर्ता: सन् उन्नीस सौ चौहत्तर में रहस्यमय कार दुर्घटना।

तीसरा कारण: वित्तीय शक्ति अकल्पनीय है
ब्लैकरॉक: 1 करोड़ डॉलर की संपत्ति प्रबंधन।
वैनगार्ड: 80 लाख करोड़ डॉलर।

यह कई देशों की जीडीपी से अधिक है।

चौथा कारण: हमारी निर्भरता

हमारी नौकरी उन्हीं की कंपनियों में। हमारा खाना उन्हीं के रसायनों से उगा। हमारी दवाई उन्हीं की फैक्ट्री में। हमारी खबर उन्हीं के मीडिया से।
जो तंत्र पर पूरी तरह निर्भर हो — वो तंत्र को चुनौती नहीं दे सकता।

पाँचवाँ कारण: बाँटो और राज करो — आज भी

जब भी लोग एकजुट होने लगते हैं: नया मुद्दा आता है, नया युद्ध आता है, नई महामारी आती है, नया विवाद आता है।
“बाँटो और राज करो” — अंग्रेज़ों ने भारत में किया। वही आज वैश्विक स्तर पर हो रहा है।

भाग बारह: तो क्या दवाई लेना बंद कर दें?

यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। और इसका जवाब सीधा है।

नहीं।
कदापि नहीं।
लेकिन समझदारी से लें।
यह लेख दवाई-विरोधी नहीं है।
यह अंध-समर्पण-विरोधी है।
जो दवाएँ जीवन बचाती हैं — वो ज़रूरी हैं:

हृदयाघात में: हाँ, तुरंत अस्पताल और दवाई।
दुर्घटना में: हाँ, आधुनिक शल्यचिकित्सा।
गंभीर संक्रमण में: हाँ, एंटीबायोटिक।
मधुमेह में अनियंत्रित स्थिति: हाँ, इंसुलिन।
कैंसर की कुछ अवस्थाओं में: हाँ, उपचार।

आधुनिक चिकित्सा ने क्या दिया — यह भी सच:
चेचक वैश्विक स्तर पर समाप्त हुई।
पोलियो लगभग खत्म हुआ।
पेनिसिलिन ने करोड़ों जानें बचाईं।
शल्यचिकित्सा ने असंभव को संभव बनाया।
समस्या दवाई में नहीं — व्यवस्था में है।

जब मुनाफ़ा, विज्ञान से बड़ा हो जाए — तब समस्या है।
जब नियामक और नियंत्रित एक ही मेज़ पर बैठें — तब समस्या है।
जब सवाल पूछने वाले चिकित्सक को “झोलाछाप” कहा जाए — तब समस्या है।

एक जागरूक रोगी के रूप में आप यह करें:
हर दवा के लिए पूछें: “क्या यह दीर्घकालिक है या अस्थायी?”
हर नुस्खे के लिए दूसरी राय लें।

अपने चिकित्सक से पूछें: “इस दवा का प्राकृतिक विकल्प क्या है?”
निवारक स्वास्थ्य पर ध्यान दें — बीमार होने से पहले।
हर टीके के बारे में जानकारी लें। सवाल पूछें।
जीवनशैली बदलें — यह सबसे शक्तिशाली दवा है।

भाग तेरह: वापसी का रास्ता — व्यावहारिक और वास्तविक

पहला: अपना भोजन बदलो — यह सबसे बड़ी क्रांति है
स्थानीय, मौसमी, पारंपरिक भोजन।
रासायनिक उर्वरक-मुक्त — जहाँ संभव हो जैविक।
प्रसंस्कृत और पैकेज्ड भोजन कम करें।
रसोई बगीचा — एक गमले से शुरू करें।
स्थानीय किसान से सीधे खरीदें।

दूसरा: प्राकृतिक चिकित्सा को प्राथमिक रखो
हर छोटी बीमारी के लिए पहले: नीम, हल्दी, अदरक, त्रिफला, तुलसी।
एक अच्छे आयुर्वेदिक वैद्य को जानें।
निवारक स्वास्थ्य: नींद, धूप, व्यायाम, सात्विक भोजन।
हर नुस्खे के लिए पूछें: “क्या प्राकृतिक विकल्प है?”

तीसरा: वित्तीय चुनाव सचेत बनाओ
स्थानीय व्यवसायों को समर्थन दो।
नकद लेन-देन करो।
बहुराष्ट्रीय निगमों की जगह भारतीय विकल्प खोजो।

चौथा: जानकारी को विविध बनाओ
एक ही स्रोत पर निर्भर मत रहो।
प्राथमिक दस्तावेज़ पढ़ो।
हर समाचार में पूछो: “इससे फ़ायदा किसे?”
अपने बच्चों को तार्किक सोच सिखाओ।

पाँचवाँ: समुदाय बनाओ
अकेले नहीं जीता जाता।
स्थानीय समुदाय समूह।
ज्ञान साझाकरण।
किसान बाज़ार, बीज बैंक।

छठा: राजनीतिक रूप से जागरूक रहो
सूचना का अधिकार यानी आरटीआई का उपयोग करो।
अपने जनप्रतिनिधियों से लिखित में सवाल पूछो।
स्थानीय चुनावों में भाग लो।
दवा उद्योग की पैरवी और स्वास्थ्य नीति को सार्वजनिक रूप से प्रश्नांकित करो।

अंतिम बात: वो जो बदला नहीं जा सकता
इतिहास एक बात बार-बार बताता है।

स्टैंडर्ड ऑयल को तोड़ा गया — सन् 1911 में।
ब्रिटिश साम्राज्य खत्म हुआ।
रंगभेद समाप्त हुआ।
भारत आज़ाद हुआ।

किसान आंदोलन सन् 2020 में जीता।

कोई भी तंत्र स्थायी नहीं।
लेकिन तंत्र तब टूटता है जब लोग जागते हैं।

लोग सवाल पूछते हैं। लोग एकजुट होते हैं। लोग विकल्प बनाते हैं।
वो नहीं चाहते कि आप यह जानें।

इसीलिए यह विद्यालयों में नहीं पढ़ाया जाता।
इसीलिए मुख्यधारा के मीडिया में नहीं आता।
इसीलिए जो बताता है उसे “षड्यंत्र सिद्धांतकार” कहते हैं।

लेकिन आज आप जान गए।
और जानना — यही पहली क्रांति है।

— पब्लिक फर्स्ट टीम

प्रलेखित स्रोत:

फ्लेक्सनर रिपोर्ट 1910 | रॉकफेलर फाउंडेशन वार्षिक रिपोर्ट | मार्सिया ऐंजेल — दवा कंपनियों की सच्चाई | न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन | ब्रिटिश मेडिकल जर्नल — पीटर दोशी 2012 | यूरोपीय संसद प्रस्ताव स्वाइन फ्लू 2010 | फाइज़र न्यायालय दस्तावेज़ 2022 | एस्ट्राज़ेनेका न्यायालय स्वीकृति 2024 | नेचर मेडिसिन — सूक्ष्म प्लास्टिक अध्ययन मार्च 2024 | विश्व स्वास्थ्य संगठन सूक्ष्म प्लास्टिक रिपोर्ट 2023 | आईएआरसी ग्लाइफोसेट वर्गीकरण 2015 | राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो किसान आत्महत्या डेटा | उत्सा पटनायक — औपनिवेशिक दोहन शोध | अमेरिकी संसद रिकॉर्ड 1917 | सीआईए अवर्गीकृत दस्तावेज़ | एंटनी सटन शोध | अमेरिकी राष्ट्रीय अभिलेखागार — प्रेस्कॉट बुश | पीएलओएस मेडिसिन एंटीडिप्रेसेंट अध्ययन 2008

“नीम हज़ारों साल से था।
पेटेंट उस पर नहीं होता।
इसीलिए वो ‘अवैज्ञानिक’ हो गया।
और कोल टार ‘आधुनिक चिकित्सा’ बन गया।”

— पब्लिक फर्स्ट
सत्य। स्वतंत्रता। स्वाभिमान।
जागृत रहें। स्वतंत्र सोचें। सत्य खोजें।

डिस्क्लेमर:

यह आलेख प्रलेखित तथ्यों और शोधों पर आधारित एक विश्लेषणात्मक प्रस्तुति है। इसका उद्देश्य किसी चिकित्सा पद्धति का अपमान करना नहीं, बल्कि प्रचलित व्यवस्था के आर्थिक पहलुओं को उजागर कर जन-जागरूकता बढ़ाना है। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी निर्णय के लिए विशेषज्ञों की सलाह अवश्य लें।

PUBLICFIRSTNEWS.COM

#AncientHealing #Ayurveda #BigPharma #FlexnerReport #HealthSystem #HiddenHistory #MedicalHistory #NaturalMedicine #OilIndustry #PetroleumIndustry #PharmaIndustry #Rockefeller
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Previous Article#UP FIRST | हमीरपुर में बारात लेकर जा रहे दूल्हे पर हमला, दबंगों ने गाड़ी रोककर की मारपीट |
Next Article #SATYA DARSHAN | जैविक से कृत्रिम तक: वो महाजाल जो 150 साल में बुना गया |
Public First News

Related Posts

SATYA DARSHAN By Public First News0 Views

#SATYA DARSHAN | ये जो सूर्य दिखता है — वह सत्य नहीं: जानिए सूर्य और क़यामत और प्रलय का रहस्य ।

SATYA DARSHAN May 26, 20260 Views
SATYA DARSHAN By Public First News0 Views

#SATYA DARSHAN | नींद का कारोबार” — कैसे ‘8 घंटे’ के पैरामीटर ने करोड़ों स्वस्थ लोगों को ‘मरीज़’ बना दिया ? जानिए सच ।

SATYA DARSHAN May 21, 20260 Views
SATYA DARSHAN By Public First News0 Views

#SATYA DARSHAN | कॉकरोच से क्रांति या Silicon Valley का नया चुनावी प्रयोग?

SATYA DARSHAN May 21, 20260 Views
SATYA DARSHAN By Public First News0 Views

#SATYA DARSHAN | जय–विजय से 2026 तक : भय, उद्धार और नियंत्रण का चक्र । संकट कौन बनाता है ?

SATYA DARSHAN May 20, 20260 Views
SATYA DARSHAN By Public First News0 Views

#SATYA DARSHAN | तेल का पूरा खेल इसी ‘डर’ पर चलता है !! ?? |

SATYA DARSHAN May 20, 20260 Views
SATYA DARSHAN By Public First News0 Views

#SATYA DARSHAN | आई.जी. फारबेन (IG Farben)—दवा भी, ज़हर भी! विश्व की सबसे खतरनाक कंपनी – 2026 आज भी – सावधान ।

SATYA DARSHAN May 19, 20260 Views
Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

Rampur By Election 2022: भगवान राम के नाम वाले रामपुर में पहली बार कोई हिंदू विधायक बना है

December 18, 20225K Views

उत्तरकाशी टनल हादसा : उम्मीद का एक और दिन

November 23, 2023513 Views

उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त

July 5, 2023408 Views

Uttarkashi Tunnel Collapse : उत्तरकाशी टनल से निकाले गए सभी 41 मजदूर

November 28, 2023271 Views
1 2 3 … 1,387 Next
Don't Miss

#KISAN FIRST | भोपाल में भारतीय किसान संघ की बड़ी बैठक, ई-टोकन और खाद वितरण पर 9 अहम मुद्दों पर मंथन |

By Public First News Kisan first May 28, 20260 Views

भारतीय किसान संघ के तीनों प्रांतों की संयुक्त बैठक विंध्याचल भोपाल में संपन्नई-टोकन प्रणाली सहित…

MP FIRST By Public First News

#MP FIRST | इंदौर से उज्जैन तक बस से पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, अधिकारियों संग किया विकास कार्यों पर मंथन

May 28, 2026 MP FIRST
MP FIRST By Public First News

#MP FIRST | मध्यप्रदेश शासन के मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप ने गुरूवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में कार्यकर्ताओं से किया संवाद |

May 28, 2026 MP FIRST
CG FIRST By Public First News

#CG FIRST | लोक निर्माण विभाग के सचिव ने सड़कों का काम देखा , अधिकारियों की बैठक लेकर काम में तेजी लाने के दिए निर्देश |

May 28, 2026 CG FIRST
Stay In Touch
  • Facebook
  • YouTube
  • TikTok
  • WhatsApp
  • Twitter
  • Instagram
Latest Reviews
Editors Picks
Top Reviews
Advertisement
Most Popular

Rampur By Election 2022: भगवान राम के नाम वाले रामपुर में पहली बार कोई हिंदू विधायक बना है

December 18, 20225K Views

उत्तरकाशी टनल हादसा : उम्मीद का एक और दिन

November 23, 2023513 Views

उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त

July 5, 2023408 Views
About Us
About Us

Public First News
Corporate Office: E/7/ HIG-139, Arera Colony, Bhopal 462016 (M.P)
Phone: 0755-7967937

Email: info@publicfirstnews.com, publicfirstnewstv@gmail.com

Public First News
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
  • Latest News
  • Crime first
  • India first
  • Politics first
  • City first
  • Astrology first
  • Sports first
Powered by Public First News, Copyright © 2026. All rights reserved by Public First News

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

Sign In or Register

Welcome Back!

Login to your account below.

Lost password?