Close Menu
Public First News
  • Bharat first
  • Crime first
  • Politics first
  • Education first
  • Panchayat first
  • Sanatan first
  • Sanskriti first
  • Youth first
  • Live Tv

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

What's Hot
CG FIRST By Public First News

#CG FIRST| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रचा इतिहास,भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने

June 10, 2026 CG FIRST
MP FIRST By Public First News

#MP FIRST | सीएम डॉ. मोहन ने लगाई अहम फैसलों पर मुहर, कपास पर मंडी फीस की दर 1% से घटाई, जानें डिटेल

June 9, 2026 MP FIRST
MP FIRST By Public First News

#MP FIRST | सहभाग किया, श्रेय नहीं लिया : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और स्वयंसेवकों का योगदान – कैलाश चन्द्र |

June 8, 2026 MP FIRST
Advertisement
Facebook X (Twitter) Instagram
Wednesday, June 10
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube RSS
Public First News
Breaking News:
  • #CG FIRST| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रचा इतिहास,भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने
  • #MP FIRST | सीएम डॉ. मोहन ने लगाई अहम फैसलों पर मुहर, कपास पर मंडी फीस की दर 1% से घटाई, जानें डिटेल
  • #MP FIRST | सहभाग किया, श्रेय नहीं लिया : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और स्वयंसेवकों का योगदान – कैलाश चन्द्र |
  • #MP FIRST | जल संरक्षण में मध्यप्रदेश बना वैश्विक मिसाल, 6 देशों के राजनयिकों ने सराहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’|
  • #MP FIRST | मोदी युग के 12 वर्ष : सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण का स्वर्णिम अध्याय |
  • #MP FIRST | उज्जैन: भागवत कथा के समापन पर CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान, नारायणा और अंका-झंका में बनेंगे श्रीकृष्ण तीर्थ |
  • #MP FIRTS | इंदौर में LAC ट्रेड एंड इंवेस्टमेंट फोरम-2026 का शुभारंभ, 15 देशों के बीच चमका मध्यप्रदेश |
  • # MP FIRST रायसेन बस हादसा: दो बसों की भीषण टक्कर में कई यात्रियों की मौत, मुख्यमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान
  • #MP FIRST | भस्म आरती में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: श्रद्धालुओं से ₹2500 प्रति व्यक्ति वसूली का मामला, तीन प्रकरणों में अनियमितता मिली |
  • #CG FIRST | विश्व पर्यावरण दिवस पर गंगा मुंडा तालाब में चला स्वच्छता अभियान, महापौर समेत सैकड़ों नागरिक हुए शामिल |
Login
  • Bharat first
  • Crime first
  • Politics first
  • Education first
  • Panchayat first
  • Sanatan first
  • Sanskriti first
  • Youth first
  • Live Tv
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube RSS
Public First News
Home»Sanatan first»SATYA DARSHAN»#SATYA DARSHAN | नींद का कारोबार” — कैसे ‘8 घंटे’ के पैरामीटर ने करोड़ों स्वस्थ लोगों को ‘मरीज़’ बना दिया ? जानिए सच ।
SATYA DARSHAN

#SATYA DARSHAN | नींद का कारोबार” — कैसे ‘8 घंटे’ के पैरामीटर ने करोड़ों स्वस्थ लोगों को ‘मरीज़’ बना दिया ? जानिए सच ।

पब्लिक फर्स्ट । सत्य दर्शन । आशुतोष ।
Public First NewsBy Public First NewsMay 21, 2026No Comments0 Views
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Telegram Tumblr Email
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

HIGHLIGHTS FIRST :

क्या आपको वाकई 8 घंटे की नींद की ज़रूरत है या यह औद्योगिक क्रांति और फॉर्मा सिंडिकेट द्वारा थोपा गया एक कृत्रिम मापदंड है?

जानिए क्यों आयुर्वेद और योगियों का विज्ञान 8 घंटे के इस ‘स्लीप ट्रैप’ को पूरी तरह खारिज करता है!

8 घंटे का कृत्रिम जाल:

जिस तरह ब्लड प्रेशर और शुगर के पैरामीटर्स रातों-रात बदलकर करोड़ों स्वस्थ लोगों को ‘मरीज़’ बना दिया गया, ठीक उसी तरह 7-9 घंटे की नींद का एक फिक्स पैमाना थोपकर अरबों डॉलर का ‘स्लीप एड्स’ (Sleep Aids) बाज़ार खड़ा किया गया।

इतिहास का सच (Pre-Industrial Era):

औद्योगिक क्रांति से पहले मनुष्य कभी भी लगातार 8 घंटे नहीं सोता था। इतिहास के दस्तावेज़ों में ‘बायफेज़िक स्लीप’ (दो चरणों में नींद) का अकाट्य प्रमाण।

आयुर्वेद का ‘त्र्युपस्तंभ’ और प्रकृति सिद्धांत:

चरक संहिता के अनुसार नींद का कोई यूनिवर्सल नंबर नहीं है। वात, पित्त और कफ प्रकृति के अनुसार हर व्यक्ति की नींद की ज़रूरत भिन्न है।

योगियों की न्यूनतम नींद का रहस्य:

कैसे उच्च चेतना, सात्विक आहार और ध्यान के माध्यम से योगी अपनी ‘प्राण ऊर्जा’ को रीचार्ज कर लेते हैं, जहाँ शरीर को सुलाने की नहीं, केवल शांत करने की आवश्यकता होती है।

संपादकीय एवं विधिक अस्वीकरण (Editorial & Legal Disclaimer)

अस्वीकरण: यह लेख प्राचीन सनातन आयुर्वेद ग्रंथों (चरक व सुश्रुत संहिता), ऐतिहासिक नींद संबंधी अनुसंधानों (विर्जिनिया टेक यूनिवर्सिटी), आधुनिक स्लीप साइंस (DSM-5) और वैश्विक फॉर्मास्यूटिकल बाज़ार के आंकड़ों पर आधारित एक विश्लेषणात्मक व तथ्य-परक प्रस्तुति है। इसका उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का अंधविरोध करना नहीं, बल्कि पाठकों को नींद की मात्रा (Quantity) के बजाय उसकी गुणवत्ता (Quality) और व्यक्तिगत शारीरिक प्रकृति (Bio-individuality) के प्रति सचेत करना है। किसी भी गंभीर अनिद्रा रोग की स्थिति में योग्य वैद्य या चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

प्रस्तावना: क्या आपको वाकई 8 घंटे की नींद की ज़रूरत है?

पिछले कुछ दशकों से हर हेल्थ मैगज़ीन, डॉक्टर और स्मार्टवॉच निर्माता आपके दिमाग में एक बात ज़बरदस्ती ठोंक रहे हैं— “अगर आप रोज़ 8 घंटे नहीं सो रहे हैं, तो आप बीमार हैं, आपका दिल कमज़ोर हो रहा है और आप अनिद्रा (Insomnia) के शिकार हैं।” इस डर का परिणाम यह है कि आज वैश्विक स्तर पर करोड़ों लोग रात को बिस्तर पर सोने से ज़्यादा इस बात की चिंता में जागते हैं कि उनकी ‘8 घंटे की गिनती’ पूरी होगी या नहीं!

लेकिन ‘Public First’ आज इस मंच से एक बड़ा सत्य उजागर करने जा रहा है। जिस तरह मेडिकल सिंडिकेट ने ब्लड प्रेशर (120/80\text{ mmHg}) और डायबिटीज (100\text{ mg/dL}) के मानक (Parameters) घटाकर रातों-रात दुनिया की आधी स्वस्थ आबादी को मरीज़ों की श्रेणी में डाल दिया, ठीक वैसा ही खेल नींद के साथ खेला गया है। एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए नींद का पैमाना घड़ियों के घंटों से नहीं, बल्कि शरीर के भीतर बहने वाली प्राण ऊर्जा और उसकी व्यक्तिगत ‘प्रकृति’ से तय होता है। आइए, इतिहास और आयुर्वेद के पन्नों को पलटकर इस पूरे खेल का एक्स-रे करते हैं।

भाग 1: आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने नींद के ‘8 घंटे’ कब और कैसे निर्धारित किए?

सवाल उठता है कि आधुनिक विज्ञान को यह दिव्य ज्ञान कब हुआ कि हर इंसान को 7 से 9 घंटे ही सोना चाहिए? इसके पीछे कोई शाश्वत सत्य नहीं, बल्कि औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) का आर्थिक एजेंडा था।

औद्योगिक क्रांति से पहले क्या था?

(The Myth of 8-Hour Sleep)

वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी के प्रसिद्ध इतिहासकार प्रोफेसर ए. रोजर एकरच (A. Roger Ekirch) ने अपने ऐतिहासिक शोध (At Day’s Close: Night in Times Past) में दुनिया भर के प्राचीन अदालती दस्तावेज़ों, डायरियों और साहित्यों को खंगाला। उन्होंने साबित किया कि औद्योगिक क्रांति से पहले पूरी दुनिया में मनुष्य कभी भी लगातार 8 घंटे नहीं सोता था।

उस समय मानव जाति ‘बायफेज़िक स्लीप’ (Biphasic Sleep – दो चरणों में नींद) लेती थी:

प्रथम निद्रा (First Sleep):

लोग सूर्यास्त के तुरंत बाद (रात 8-9 बजे) सो जाते थे और आधी रात को (12 से 1 बजे के आसपास) अपने आप उठ जाते थे।

जागरण काल (The Watch):

आधी रात को उठकर लोग 1 से 2 घंटे ध्यान करते थे, किताबें पढ़ते थे, प्रार्थना करते थे या आपस में बातें करते थे। इस समय मस्तिष्क में प्रोलैक्टिन (Prolactin) नामक हार्मोन चरम पर होता था, जो अत्यधिक मानसिक शांति देता था।

द्वितीय निद्रा (Second Sleep):

इसके बाद लोग सुबह सूर्योदय तक दोबारा सोते थे।

औद्योगिक क्रांति से पहले का स्लीप पैटर्न (बायफेज़िक स्लीप):
[सूर्यास्त] ──> प्रथम निद्रा (4 घंटे) ──> मध्यरात्रि जागरण (1-2 घंटे ध्यान/चिंतन) ──> द्वितीय निद्रा (3 घंटे) ──> [सूर्योदय]

कारखानों ने बदला नींद का गणित:

19वीं शताब्दी में जब बड़े-बड़े कारखाने खुले और ‘9 to 5’ की शिफ्ट का चलन शुरू हुआ, तो रॉकफेलर और कॉर्पोरेट सिंडिकेट को ऐसे मज़दूरों की ज़रूरत थी जो लगातार 8 घंटे फैक्ट्री की असेंबली लाइन पर बिना रुके काम कर सकें। कारखानों के मालिकों ने इंसानी शरीर को भी एक फैक्ट्री की मशीन मान लिया। उन्होंने मनुष्यों के प्राकृतिक बायफेज़िक स्लीप पैटर्न को नष्ट करके ज़बरदस्ती ‘मोनोफेज़िक स्लीप’ (Monophasic Sleep – एक बार में लगातार 8 घंटे सोना) में बदल दिया ताकि उनका वर्किंग शेड्यूल डिस्टर्ब न हो।

भाग 2: अनिद्रा (Insomnia) को ‘वैश्विक बीमारी’ कब और क्यों बनाया गया?

जब इंसानों को कृत्रिम रूप से लगातार 8 घंटे सोने के सांचे में ढाला गया, तो स्वाभाविक रूप से लाखों लोगों का शरीर इस थोपे गए नियम का विरोध करने लगा। जिनकी जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) अलग थी, उन्हें रात को बीच में नींद टूटने पर डर लगने लगा।
इसी डर को भुनाने के लिए 1979 में अमेरिकन स्लीप डिसऑर्डर्स एसोसिएशन की स्थापना हुई। इसके तुरंत बाद, आधुनिक मनोरोग विज्ञान की बाइबल DSM-III (Diagnostic and Statistical Manual of Mental Disorders, 1980) में ‘इंसोमनिया’ (अनिद्रा) को एक औपचारिक मानसिक और शारीरिक बीमारी के रूप में दर्ज कर लिया गया।

पैरामीटर सेट करने का मुनाफा:

वर्ष 2015 में नेशनल स्लीप फाउंडेशन (National Sleep Foundation) ने वयस्कों के लिए 7-9 घंटे की नींद की सख्त सिफारिश (Recommendation) जारी की। इसके बाद क्या हुआ? जो व्यक्ति अपनी प्राकृतिक शारीरिक बनावट के कारण महज़ 5 घंटे की नींद में पूरी तरह तरोताज़ा महसूस करता था, वह भी खुद को ‘मरीज़’ समझने लगा।

मुनाफे का आंकड़ा:

इस कृत्रिम डर का नतीजा यह है कि वर्ष 2023 तक वैश्विक स्लीप एड्स मार्केट (नींद की दवाइयाँ, स्लीप ट्रैकिंग गैजेट्स, गद्दे, साउंड मशीनें) $80 बिलियन (लगभग ₹6,60,000 करोड़) से अधिक का हो चुका है और यह तेज़ी से बढ़ रहा है। फार्मा सिंडिकेट ने पहले 8 घंटे का नियम थोपकर समस्या पैदा की, फिर आपको डराया, और अब आपको सुलाने के लिए गोलियों (Sleeping Pills) का समाधान बेच रहा है।

भाग 3: आयुर्वेद में एक स्वस्थ व्यक्ति की नींद का वास्तविक मापदंड क्या है?

अब आधुनिक विज्ञान के इस ‘एक साइज़ सबके लिए’ (One Size Fits All) वाले भ्रम से बाहर निकलिए और सनातन आयुर्वेद के शाश्वत सत्य को समझिए।

आयुर्वेद के परम ग्रंथ चरक संहिता (सूत्रस्थान, अध्याय 21) में शरीर को टिकाए रखने के लिए तीन मूल स्तंभ बताए गए हैं, जिन्हें ‘त्र्युपस्तंभ’ कहा जाता है:

चरक संहिता के अनुसार, नींद का कोई एक वैश्विक नंबर (घंटा) हो ही नहीं सकता। आयुर्वेद का पूरा विज्ञान ‘प्रकृति’ (Bio-individuality) पर आधारित है। हर व्यक्ति के शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन अलग होता है, और इसी के आधार पर उसकी नींद निर्धारित होती है:

शारीरिक प्रकृति (Prakriti)नींद की अवधि (Duration)नींद की गुणवत्ता (Quality)शारीरिक लक्षण (Symptoms)
वात प्रकृति (Vata)कम नींद (4 – 6 घंटे)हल्की, खंडित (Broken Sleep), सपनों से भरीवात के प्रभाव से मन चंचल रहता है। यदि ये लोग 5 घंटे सोकर भी फ्रेश हैं, तो ये पूरी तरह स्वस्थ हैं। इन्हें ज़बरदस्ती सुलाना बीमारी को न्यौता देना है।

आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ नींद की परिभाषा क्या है?

ऋषियों ने नींद को मापने के लिए कोई ‘घड़ी’ नहीं बनाई थी। चरक संहिता के अनुसार, यदि आप ‘ब्रह्म मुहूर्त’ (सूर्योदय से लगभग 1.5 घंटे पहले) उठते हैं और उठते समय आपके शरीर में कोई भारीपन नहीं है, मन प्रसन्न है, इंद्रियां जाग्रत हैं और पेट साफ हो रहा है, तो आपकी नींद पूरी हो चुकी है—चाहे वह 4 घंटे की ही क्यों न हो!

भाग 4: योगी और मुनि इतनी कम नींद में लंबी आयु कैसे जी लेते हैं?

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान कहता है कि कम सोने से उम्र कम होती है और बीमारियां बढ़ती हैं। लेकिन हमारे सामने भारत के योगियों, मुनियों और संतों का जीवंत उदाहरण है, जो महज़ 2 से 3 घंटे सोते हैं, फिर भी 100-100 वर्षों तक बिना किसी बीमारी के परम ऊर्जावान बने रहते हैं। इसके पीछे का विज्ञान क्या है?

इसके पीछे का रहस्य है— ‘प्राण ऊर्जा का प्रबंधन’ (Prana Energy Management)।

1. ‘नींद’ की ज़रूरत क्यों होती है?

जब हम जागते हैं, तो हमारा मस्तिष्क और मन लगातार विचारों के चक्रव्यूह में उलझा रहता है। आधुनिक मनुष्य का मन चौबीसों घंटे तनाव, चिंता और इच्छाओं की आग में जलता है, जिससे शरीर की ‘मेटाबॉलिक ऊर्जा’ बहुत तेज़ी से नष्ट होती है। इस टूटे-फूटे तंत्र को रीपेयर करने के लिए शरीर को चेतना को पूरी तरह ‘जड़’ (Unconscious) करना पड़ता है, जिसे हम नींद कहते हैं।

2. योगी नींद से आगे क्यों निकल जाते हैं?

योगी या ध्यानी पुरुष अपने विचारों को नियंत्रित करना सीख जाते हैं। वे जागते हुए भी ‘तटस्थ’ (Meditative State) होते हैं। उनका मन ऊर्जा नष्ट नहीं करता।

योग निद्रा (Yogic Sleep):

स्वामी राम और कई सिद्ध योगियों पर लैब्स में हुए शोधों ने साबित किया है कि जब एक योगी मात्र 20 मिनट के लिए ध्यान या योग निद्रा में बैठता है, तो उसका मस्तिष्क ‘डेल्टा वेव्स’ (Delta Waves) उत्सर्जित करने लगता है—यह वही ब्रेन वेव्स हैं जो आम इंसान को रात के 2 घंटे की सबसे गहरी नींद (Deep Sleep) में मिलती हैं।

सात्विक आहार और अग्निलिंग देह:

चूंकि योगी न्यूनतम और अत्यंत सात्विक भोजन लेते हैं, उनके पाचन तंत्र को भोजन पचाने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा नहीं लगानी पड़ती। उनका ‘अग्निलिंग’ रूपी मानव देह ब्रह्मांडीय ऊर्जा से सीधे रीचार्ज होता रहता है। इसलिए उनके शरीर के अंगों को रीपेयर होने के लिए 8 घंटे तक मृतप्राय अवस्था (Sleep) में रहने की आवश्यकता ही नहीं होती।

भाग 5: मंदी और आलस्य का चक्रव्यूह— नंबर्स से नहीं, अनुभव से जागो!

आज के इस ए.आई. और मंदी के दौर में जहाँ “परिश्रम से जो घबराएगा, वही मंदी से घिर जाएगा” का नियम लागू है, वहाँ 8 घंटे सोने की जिद आपको और आलसी बना रही है।
आप खुद का परीक्षण घड़ियों के नंबर्स से नहीं, बल्कि अपने जीवंत अनुभव से करें:

क्वांटिटी बनाम क्वालिटी:

रात भर बिस्तर पर करवटें बदलते हुए 8 घंटे बिताने से बेहतर है, 5 घंटे की ऐसी गहरी, शांत और अखंडित नींद लेना जिसमें कोई दुःस्वप्न न हो।

नेचुरल लाइट साइकिल:

प्रकृति के नियम (Circadian Rhythm) के अनुसार चलें। रात को जल्दी सोना और सुबह सूर्य की पहली किरण से पहले उठना, आपके शरीर की आंतरिक फार्मेसी को एक्टिवेट कर देता है।

ऋतुचर्या (Seasonal Variations):

आयुर्वेद कहता है कि सर्दियों में शरीर को अधिक आराम (लंबी नींद) की आवश्यकता होती है, जबकि गर्मियों में कम नींद भी पर्याप्त होती है।

निष्कर्ष: अपनी जैविक संप्रभुता को वापस पहचानो

नींद के घंटों का यह पैरामीटर भी रॉकफेलर और मैकालेवादी व्यवस्था का एक ऐसा ही टूल है जो आपको अपनी खुद की शारीरिक सहज बुद्धि (Body Intuition) पर भरोसा करना छुड़ा देता है। जब आप अपनी कलाई की नाड़ी और अपने शरीर के संकेतों को समझना बंद कर देते हैं, तभी आप कंपनियों के ‘स्लीप ट्रैकिंग ऐप्स’ के गुलाम बनते हैं।

अपनी चेतना को जगाइए। आपका शरीर किसी कॉर्पोरेट कंपनी की मशीन नहीं है जिसे 8 घंटे के चार्जिंग स्लॉट की ज़रूरत हो। यदि आपका आहार शुद्ध है, आपका विचार सात्विक है, और आप श्रम से नहीं घबराते, तो आपकी प्रकृति आपके लिए नींद के घंटे खुद तय कर लेगी।

Public First का स्पष्ट संदेश:

घड़ी की सुइयों को देखकर खुद को बीमार या अनिद्रा का रोगी मानना बंद कीजिए। अपने भीतर के ‘अग्निलिंग’ स्वरूप को पहचानिए। यदि सुबह उठकर आपके भीतर ऊर्जा का संचार है, तो आप पूरी तरह स्वस्थ हैं। इस $80 बिलियन के स्लीप सिंडिकेट के डर को अपने दिमाग से बाहर निकालिए और प्रकृति के शाश्वत नियमों की ओर लौटिए।

Public First | सत्य। स्वतंत्रता। स्वाभिमान।

प्रामाणिक संदर्भ (Core Factual References):

  1. चरक संहिता: सूत्रस्थान, अध्याय २१ (अष्टौनिन्दितीय अध्याय – निद्रा एवं त्र्युपस्तंभ विमर्श)।
  2. A. Roger Ekirch (Virginia Tech): At Day’s Close: Night in Times Past (Historical Proof of Biphasic Sleep System).
  3. American Psychiatric Association: Diagnostic and Statistical Manual of Mental Disorders (DSM-III, 1980 & DSM-5, 2013) – Evolution of Insomnia Parameters.
  4. National Sleep Foundation (2015 Guidelines): Sleep Duration Recommendations and its Economic Impact on Sleep Aids Market.
  5. Matthew Walker (Neuroscientist): Why We Sleep: Unlocking the Power of Sleep and Dreams (Analysis on Quality vs Quantity).

PUBLICFIRSTNEWS.COM

#8HoursSleep #Ayurveda #BiphasicSleep #CircadianRhythm #DeepSleep #HealthTruth #Insomnia #ModernLifestyle #PranaEnergy #Satyadarshan #SleepIndustry #SleepMyth #SleepScience #SleepTrap #YogaNidra
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
Previous Article#CG FIRST | मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तेंदूपत्ता संग्राहकों से किया आत्मीय संवाद, सुनी समस्याएं |
Next Article #MP FIRST | संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन बना भोपाल का दूसरा जंक्शन, क्षेत्र को मिली बड़ी विकास सौगात |
Public First News

Related Posts

SATYA DARSHAN By Public First News0 Views

#SATYA DARSHAN | AGNILING | शिवलिंग पर जल क्यों? | अभिषेक कब से और किसने शुरू किया? | मूल शैव साधना का सच | सम्पूर्ण इतिहास

SATYA DARSHAN May 29, 20260 Views
SATYA DARSHAN By Public First News0 Views

#SATYA DARSHAN | ये जो सूर्य दिखता है — वह सत्य नहीं: जानिए सूर्य और क़यामत और प्रलय का रहस्य ।

SATYA DARSHAN May 26, 20260 Views
SATYA DARSHAN By Public First News0 Views

#SATYA DARSHAN | कॉकरोच से क्रांति या Silicon Valley का नया चुनावी प्रयोग?

SATYA DARSHAN May 21, 20260 Views
SATYA DARSHAN By Public First News0 Views

#SATYA DARSHAN | जय–विजय से 2026 तक : भय, उद्धार और नियंत्रण का चक्र । संकट कौन बनाता है ?

SATYA DARSHAN May 20, 20260 Views
SATYA DARSHAN By Public First News0 Views

#SATYA DARSHAN | तेल का पूरा खेल इसी ‘डर’ पर चलता है !! ?? |

SATYA DARSHAN May 20, 20260 Views
SATYA DARSHAN By Public First News0 Views

#SATYA DARSHAN | आई.जी. फारबेन (IG Farben)—दवा भी, ज़हर भी! विश्व की सबसे खतरनाक कंपनी – 2026 आज भी – सावधान ।

SATYA DARSHAN May 19, 20260 Views
Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

Rampur By Election 2022: भगवान राम के नाम वाले रामपुर में पहली बार कोई हिंदू विधायक बना है

December 18, 20225K Views

उत्तरकाशी टनल हादसा : उम्मीद का एक और दिन

November 23, 2023513 Views

उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त

July 5, 2023408 Views

Uttarkashi Tunnel Collapse : उत्तरकाशी टनल से निकाले गए सभी 41 मजदूर

November 28, 2023271 Views
1 2 3 … 1,395 Next
Don't Miss

#CG FIRST| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रचा इतिहास,भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने

By Public First News CG FIRST June 10, 20260 Views

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। देश की जनता…

MP FIRST By Public First News

#MP FIRST | सीएम डॉ. मोहन ने लगाई अहम फैसलों पर मुहर, कपास पर मंडी फीस की दर 1% से घटाई, जानें डिटेल

June 9, 2026 MP FIRST
MP FIRST By Public First News

#MP FIRST | सहभाग किया, श्रेय नहीं लिया : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और स्वयंसेवकों का योगदान – कैलाश चन्द्र |

June 8, 2026 MP FIRST
MP FIRST By Public First News

#MP FIRST | जल संरक्षण में मध्यप्रदेश बना वैश्विक मिसाल, 6 देशों के राजनयिकों ने सराहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’|

June 8, 2026 MP FIRST
Stay In Touch
  • Facebook
  • YouTube
  • TikTok
  • WhatsApp
  • Twitter
  • Instagram
Latest Reviews
Editors Picks
Top Reviews
Advertisement
Most Popular

Rampur By Election 2022: भगवान राम के नाम वाले रामपुर में पहली बार कोई हिंदू विधायक बना है

December 18, 20225K Views

उत्तरकाशी टनल हादसा : उम्मीद का एक और दिन

November 23, 2023513 Views

उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त

July 5, 2023408 Views
About Us
About Us

Public First News
Corporate Office: E/7/ HIG-139, Arera Colony, Bhopal 462016 (M.P)
Phone: 0755-7967937

Email: info@publicfirstnews.com, publicfirstnewstv@gmail.com

Public First News
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
  • Latest News
  • Crime first
  • India first
  • Politics first
  • City first
  • Astrology first
  • Sports first
Powered by Public First News, Copyright © 2026. All rights reserved by Public First News

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

Sign In or Register

Welcome Back!

Login to your account below.

Lost password?