हमीरपुर जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां जहर खाकर जान देने वाले वन रक्षक की मौत के बाद पूरे वन विभाग पर सवाल खड़े हो गए हैं। अंतिम संस्कार के दौरान मिले सुसाइड नोट ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है।

इलाज के दौरान हुई मौत

राठ कोतवाली क्षेत्र के भीषमपुर इटरौर गांव निवासी 58 वर्षीय वन रक्षक चंद्रशेखर सिंह, जो राठ के घनौरी डिपो में तैनात थे, ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें पहले उरई मेडिकल कॉलेज और फिर कानपुर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

सुसाइड नोट में गंभीर आरोप

मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया, जब अंतिम संस्कार के दौरान मृतक की पैंट की जेब से दो पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ। इसमें वन निगम के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर 2.65 लाख रुपये के कथित लकड़ी गबन मामले में फंसाने और पैसे न देने पर जेल भेजने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

बताया जा रहा है कि मरने से पहले वन कर्मी ने कुछ लोगों के नाम भी लिए थे, जो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे और इसी कारण उन्होंने यह कदम उठाया।

परिजनों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने पोस्टमार्टम न कराने का दबाव बनाया और कहा कि ऐसा करने पर ईपीएफ और जीपीएफ जैसी धनराशि नहीं मिलेगी। डर के चलते परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था, लेकिन सुसाइड नोट मिलने से पूरा मामला उजागर हो गया।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और अंतिम संस्कार रुकवाकर शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधीक्षक के अनुसार, सुसाइड नोट को जांच में शामिल कर लिया गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी

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