देवास | मध्यप्रदेश के देवास से एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां कलेक्टर कार्यालय के नाम पर अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर और सील लगाकर जमीन अंतरण के नकली आदेश जारी किए जा रहे थे। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले का खुलासा तब हुआ जब पंजीयन कार्यालय में एक संदिग्ध आदेश प्रस्तुत किया गया। दस्तावेज पर शक होने के बाद इसकी जानकारी कलेक्टर को दी गई, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए बीएनपी थाना पुलिस ने जांच शुरू की।
पुलिस ने इस मामले में 3 बाबू और 1 बिचौलिये को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश जारी है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि नजूल शाखा और अन्य तहसीलों में पदस्थ बाबू, अधिकारियों की जानकारी के बिना उनके हस्ताक्षर और सील की नकल कर फर्जी आदेश तैयार कर रहे थे। इन नकली आदेशों के जरिए जमीन अंतरण की प्रक्रिया को अवैध रूप से अंजाम दिया जा रहा था।
चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक एक दर्जन से अधिक फर्जी आदेश जारी होने की आशंका जताई जा रही है। इतना ही नहीं, एक फर्जी आदेश के आधार पर जमीन की रजिस्ट्री भी हो चुकी है, जिसे अब निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुलिस ने बिचौलिये महेंद्र कुशवाह की निशानदेही पर अन्य आरोपियों को पकड़ा है और उनसे पूछताछ जारी है।
सीएसपी सुमित अग्रवाल के अनुसार, आरोपियों द्वारा आदेशों और अनुमतियों की कूट रचना कर अवैध लाभ अर्जित किया गया है। मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और जांच के दौरान सामने आने वाले सभी नामों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं और सभी दोषियों को पद से हटाने की बात कही है।
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह फर्जीवाड़ा कब से चल रहा था और इसमें और कौन-कौन शामिल हैं।
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