‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’—इस वैदिक वाक्य के माध्यम से प्रकृति और मानव के अटूट संबंध को दर्शाते हुए, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम डॉ. मोहन यादव ने ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि जिस धरती पर हमें जन्म मिला है, उसका संरक्षण करना केवल कर्तव्य ही नहीं, बल्कि हर नागरिक का परम धर्म है। पृथ्वी हमें जीवन, संसाधन और अस्तित्व प्रदान करती है, ऐसे में इसका संतुलन बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में बढ़ते पर्यावरणीय संकट—जैसे जल की कमी, जंगलों की कटाई और भूमि के क्षरण—हमारे सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़े हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करना कठिन हो जाएगा।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ को केवल एक औपचारिक आयोजन न मानें, बल्कि इसे एक जनआंदोलन का रूप दें। उन्होंने कहा कि हमें अपने दैनिक जीवन में प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनते हुए, पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संयमित उपयोग को पृथ्वी की रक्षा का मूल मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि यदि हर नागरिक एक पौधा लगाने और उसे संरक्षित करने का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छता, हरित ऊर्जा के उपयोग और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली को अपनाकर हम पृथ्वी के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। यह केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा है।

अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ के अवसर पर यह संकल्प लें कि वे जल, जंगल और जमीन को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, हरित और समृद्ध पृथ्वी का निर्माण करेंगे।

PUBLICFIRSTNEWS.COM

Share.
Leave A Reply