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टेन्योर से 3 दिन पहले ऐसा क्यों कर रहे हैं पाकिस्तान के PM; जानिए सियासी खेल

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने मंगलवार को अहम ऐलान किया। कहा- बुधवार को मैं नेशनल असेंबली भंग करने की सिफारिश और समरी राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के पास भेज दूंगा। शाहबाज सरकार का टेन्योर 12 अगस्त को खत्म हो रहा है। इसके 3 दिन पहले नेशनल असेंबली (जैसे हमारे यहां लोकसभा) भंग करने की बात करके शाहबाज ने सियासी दांव खेला है।

कुछ दिन पहले शाहबाज ने कहा था- जनरल इलेक्शन तय वक्त (अक्टूबर के आखिर या नवंबर की शुरुआत) पर होंगे। इसके साथ ही राज्यों में भी चुनाव कराए जाएंगे। हालांकि, उनके ही होम मिनिस्टर राणा सनाउल्लाह ने मंगलवार को कहा- मार्च से पहले इलेक्शन कराना मुमकिन ही नहीं है।

सवाल ये है कि पाकिस्तान में जनरल इलेक्शन कब होंगे? शाहबाज ने असेंबली डिसॉल्व करने की सिफारिश 3 दिन पहले क्यों की? यहां ऐसे ही कुछ अहम सवालों के जवाब जानते हैं।

नेशनल असेंबली डिसॉल्व करने की सिफारिश आज ही क्यों

  • यही सवाल सबसे अहम है। इसका जवाब हासिल करने के लिए दो वजहों पर गौर करना जरूरी है। पहली वजह- नेशनल असेंबली का टेन्योर 12 अगस्त तक था। इसको भंग करने की समरी 9 अगस्त को भेजी जा रही है। अब प्रेसिडेंट आरिफ अल्वी समरी को 48 घंटे में मंजूरी देंगे। अगर दो दिन में वो ऐसा नहीं करते हैं तो संविधान के मुताबिक, नेशनल असेंबली भंग मानी जाएगी।
  • दूसरी वजह- पाकिस्तान का संविधान कहता है कि अगर टेन्योर खत्म होने के पहले असेंबली डिसॉल्व की जाती है तो उन हालात में इलेक्शन 90 दिन के अंदर कराए जाएं। दूसरी तरफ, अगर नेशनल असेंबली अगर तय वक्त (इस बार 12 अगस्त 2023) पर भंग की जाती है तो इलेक्शन 60 दिन के भीतर कराने होंगे। जाहिर है, तीन दिन पहले असेंबली भंग करके शाहबाज चुनाव को कम से कम एक महीना टाल सकते हैं।

अब अलायंस की मजबूरी समझिए

  • शाहबाज सत्तारूढ़ गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक फ्रंट (PDM) के मेंबर हैं। संसद में अपोजिशन की मौजूदगी न के बराबर है। इसकी वजह यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) पहले ही राज्यों की विधानसभा और नेशनल असेंबली छोड़ चुकी है।
  • PDM मोटे तौर पर तीन पार्टियों का अलायंस है। ये हैं- पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (PML-N), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) और जमीयत-ए-उलेमा-ए- इस्लाम फजल (JUF)। वैसे इस अलायंस में कुल 13 पार्टियां हैं।
  • PML-N और PPP इमरान खान की पॉपुलैरिटी को कम करने के लिए चुनाव टालना चाहते हैं, लेकिन JUF के चीफ मौलाना फजल-उर- रहमान चाहते हैं कि चुनाव वक्त पर यानी अक्टूबर या नवंबर 2023 में ही हों। इसकी वजह ये है कि मौलाना कट्टरपंथी पार्टी के प्रमुख हैं और उनका खैबर पख्तूनख्वा राज्य में खासा असर है। उनके तालिबान से करीबी रिश्ते हैं और वो किसी तरह इलेक्शन जीतकर खैबर के मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं।
  • ‘जियो न्यूज’ के मुताबिक- शाहबाज और आसिफ अली जरदारी को फ्यूचर में भी मौलाना की जरूरत पड़ सकती है। लिहाजा, वो संसद भंग करने के बाद भी जितना मुमकिन हो सके, उतने वक्त के लिए इलेक्शन टालना चाहते हैं।

इस साल चुनाव क्यों बेहद मुश्किल
काउंसिल ऑफ कॉमन इंट्रेस्ट (CCI) ने पिछले हफ्ते मीटिंग की थी। इसमें जनगणना 2023 को मंजूरी दी गई थी। अब इलेक्शन कमीशन ऑफ पाकिस्तान (ECP) को इसी जनगणना के आधार पर नए चुनाव क्षेत्र (परिसीमन या delimitation) बनाने हैं।

इलेक्शन कमीशन कह चुका है कि उसे परिसीमन के लिए कम से कम 6 महीने चाहिए। इसके बाद ही वो राज्यों या फिर नेशनल असेंबली के इलेक्शन करा सकता है। जनगणना को चारों राज्य भी मंजूर कर चुके हैं। लिहाजा, परिसीमन के लिए 6 महीने दिए जाएंगे और अगले साल फरवरी या मार्च के पहले इलेक्शन कराना मुमकिन नहीं होगा।

फिलहाल, क्या होने जा रहा है

  • शाहबाज सरकार की विदाई के बाद केयरटेकर सरकार आएगी। इसके प्रधानमंत्री का नाम एक या दो दिन में सामने आ जाएगा। पाकिस्तान की इकोनॉमी IMF से 3 अरब डॉलर मिलने के बाद बमुश्किल दिवालिया होने से बची है।
  • IMF ने जो कर्ज दिया है, उसकी शर्तें भी बेहद सख्त हैं। ऐसे में माना ये जा रहा है कि फौज और इलेक्शन कमीशन ऐसा प्रधानमंत्री लाना चाहेंगे जो गैर सियासी हो और मुल्क की इकोनॉमी को पटरी पर लाने के लिए IMF की शर्तें थोप दे।

इससे फायदा ये होगा कि इकोनॉमी न सिर्फ पटरी पर लाई जा सकेगी, बल्कि तमाम सियासी पार्टियों पर किसी तरह की तोहमत भी नहीं लगेगी। दूसरी तरफ, इमरान जेल में हैं और उनके पार्टी के ज्यादातर नेता दूसरे दलों में शामिल हो गए हैं। तो ये मान लिया जाना चाहिए कि अगले चुनाव जब भी होंगे तो नवाज शरीफ और जरदारी के साथ मौलाना ही फिर सरकार बनाने में कामयाब हो जाएंगे।

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