मध्यप्रदेश के पवित्र और ऐतिहासिक शहर उज्जैन में आज से पांच‑दिवसीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव – IFFAS 2026 का भव्य आयोजन शुरू हो चुका है। इस महोत्सव को “इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ एंशिएंट स्प्लेंडर” के नाम से आयोजित किया गया है, जो अब अपने तीसरे वर्ष में वैश्विक पहचान बनाने में सफल रहा है।
यह महोत्सव महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ और राज्य सरकार के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है, और इसका उद्देश्य सिनेमा के माध्यम से प्राचीन सभ्यताओं, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं को एक वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है।
आज के पहले दिन महोत्सव की शुरुआत उज्जैन स्थित कालिदास अकादमी के अभिरंग सभागार में सुबह 11 बजे से हुई, जहाँ दर्शकों ने हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की ऐतिहासिक व धार्मिक फिल्मों का आनंद लिया। जिन फिल्मों को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया उनमें शामिल हैं — राजा हरिश्चंद्र, भारत मिलाप, वामन अवतार, जय महादेव और माया मच्छिंद्र।
इतना ही नहीं, इस महोत्सव में गुजराती, तेलुगु, राजस्थानी, तमिल और बांग्ला फिल्मों ने भी दर्शकों का दिल जीता। इन फिल्मों के ज़रिये भारतीय विविध सिनेमा की संस्कृति और परंपरा का समृद्ध चित्र दिखाया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस आयोजन में सिर्फ भारतीय फिल्में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के कई देशों की फिल्मों का भी प्रदर्शन हो रहा है। कार्यक्रम में इक्वाडोर, जर्मनी, वेनेजुएला, इजराइल, इंडोनेशिया और क्यूबा समेत कई देशों की फीचर फिल्मों और डॉक्यूमेंट्रीज को भी शामिल किया गया है — जिससे भारतीय और वैश्विक सिनेमा के बीच एक सांस्कृतिक संवाद स्थापित हो रहा है।
उज्जैन की धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाती वृत्तचित्र फिल्में जैसे 84 महादेव (गुप्त शिव मंदिर), मायसन (वियतनाम का शिव मंदिर परिसर) तथा सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या के संबंध जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को गहरे सोच में डाल दिया।
इस महोत्सव में भारत और विदेश से आए राजनयिक प्रतिनिधि, फिल्म निर्देशक, कलाकार और सांस्कृतिक विशेषज्ञ भी उपस्थित हैं, जिन्होंने महोत्सव को एक वैश्विक सिनेमा मंच के रूप में सफल घोषित किया है।
आगामी चार दिनों में महोत्सव में और भी कई अंतरराष्ट्रीय फिल्मों, चर्चाओं और विशेष सत्रों का प्रदर्शन होगा, जिनसे युवा फिल्मकारों, छात्रों और दर्शकों को वैश्विक सांस्कृतिक समझ और सीखने का अवसर मिलेगा।
उज्जैन का यह अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव प्राचीन सभ्यताओं और सांस्कृतिक विविधता को दुनिया के सामने पेश करने के साथ‑साथ भारत को एक वैश्विक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
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