उज्जैन: सावन–भादव मास के पावन दिनों में बाबा महाकाल की सवारी देखने हर साल लाखों श्रद्धालु उज्जैन आते हैं। इस बार जिला प्रशासन, पुलिस और सांसद द्वारा एक मायावी पहल की गई है—‘नो सेल्फी सावन’। सांसद अनिल फिरोजिया, कलेक्टर रोशन कुमार सिंह, और एसपी प्रदीप शर्मा ने सार्वजनिक रूप से अपील की है कि श्रद्धालु महाकाल की सवारी के दौरान मोबाइल फोन में व्यस्त न हों, बल्कि अपनी आँखों से दिव्यता का अनुभव करें।
पिछले कई वर्षों में श्रद्धालुओं के सेल्फी लेने की आदत ने दर्शन को बाधित किया। जैसे ही महाकाल की पालकी आती है, भक्तों की भीड़ इतनी सघन हो जाती है कि सामने से दर्शन कठिन हो जाते हैं और कई बार दुर्घटनाएं भी होती हैं। इस बार प्रशासन ने दृढ़ निर्णय लिया है—मोबाइल से सेल्फी लेने या वीडियो बनाने की अनुमति नहीं होगी।
सांसद अनिल फिरोजिया का संदेश
सांसद फिरोजिया ने कहा, “श्रद्धालु अपनी आँखों से भगवान के दर्शन करें, फोटो या सेल्फी लेकर वापस न रहें। उन्होंने युवा और सभी भक्तों से आग्रह किया कि जब आप दर्शन कर रहे हों, तो सेल्फी की बजाय आस्था और भावना के साथ उपस्थित रहें।”
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह की चिंता
जिला कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया, “सेल्फी लेने की वजह से श्रद्धालुओं की भीड़ जुट जाती है, जिससे मृत्यु-दुर्घटना की संभावना बन जाती है। सभी श्रद्धालु एक-दूसरे को दर्शन का अवसर दें और इस बार ‘नो सेल्फी’ अभियान का उल्लंघन न हो।”
एसपी प्रदीप शर्मा की सुरक्षा तैयारी
एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा, “भक्त फोटो और वीडियो लेने की वजह से एक-दूसरे को धक्का देते हैं, जिससे अव्यवस्था फैलती है और सवारी की राजसी गरिमा टूटती है। इस बार हमने सवारी मार्ग पर CCTV कैमरे लगाए हैं और मोबाइल डिटेक्शन टीम भी तैनात की है। यदि कोई श्रद्धालु मोबाइल का उपयोग करता है, तो उसे तत्काल रोका जाएगा या सवारी क्षेत्र से बाहर भेजा जा सकता है।”
‘नो सेल्फी सावन’ योजना: क्या-क्या होगा?
- पूरी सवारी मार्ग पर CCTV कैमरे की निगरानी
- मोबाइल डिटेक्शन टीम द्वारा तुरंत रोकथाम
- उल्लंघन पर श्रद्धालु को सवारी से बाहर किया जा सकता है
- सभी मीडिया और कार्यक्रम सहायक को भी इस निर्देश का पालन अनिवार्य होगा
शांतिकारक आयोजन के लिए अपील
प्रशासन, सांसद और पुलिस ने मिलकर इस पहल की शुरुआत की है ताकि सवारी शांति, दिव्यता और अनुशासन से सम्पन्न हो। उन्होंने सभी से आग्रह किया है कि वे इस पवित्र आयोजन में पूर्ण सहयोग दें और महाकाल के प्रति अपनी आस्था आँखों से महसूस करें—ना कि कैमरे से कैद हों।
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