लवखेड़ी धाम में वर्ष 2007 से चली आ रही श्रीराम कथा की परंपरा के तहत इस वर्ष भी भव्य धार्मिक आयोजन का सफल आयोजन किया गया। 26 दिसंबर से प्रारंभ हुए इस आयोजन का विधिवत समापन नानी बाई के मायरे के साथ हुआ। आयोजन की विशेषता यह रही कि यह कार्यक्रम सर्व समाज के सहयोग से संपन्न हुआ, जबकि नानी बाई का मायरा संत शिरोमणि रविदास समाज द्वारा लाया गया, जिसने सामाजिक समरसता और एकता का सशक्त संदेश दिया।

आयोजन समिति के सदस्य डॉ. जगदीश चौहान ने बताया कि लवखेड़ी धाम में बीते 10 से 15 वर्षों से निरंतर श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। समिति द्वारा प्रतिवर्ष विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वर्ष श्रीराम कथा के साथ नानी बाई का मायरा जोड़े जाने से आयोजन की भव्यता और धार्मिक भाव और अधिक प्रबल हुआ। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, वहीं आसपास के गांवों का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा।

धर्म-जागरण और सामाजिक एकता का संदेश

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्र, धर्म और समाज को जागृत करने का माध्यम भी है। वक्ताओं ने बांग्लादेश सहित विश्व के विभिन्न हिस्सों में हिंदू समाज के साथ हो रही घटनाओं का उल्लेख करते हुए समाज को संगठित और सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न न हों, इसके लिए समाज को एकजुट रहना आवश्यक है।

संत शिरोमणि रविदास समाज द्वारा नानी बाई का मायरा और मामेरा लाया जाना सर्व समाज की सहभागिता और आपसी समरसता का प्रतीक बना। वक्ताओं ने कहा कि धर्म, संस्कृति, संस्कार और एकता भारत की पहचान हैं, जो अनादि काल से चली आ रही हैं और आगे भी समाज को दिशा देती रहेंगी।

आयोजन समिति ने जताया आभार

कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजन समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं, सहयोगी समाजों और आसपास के गांवों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। वक्ताओं ने विश्वास जताया कि हनुमान जी महाराज की कृपा से भविष्य में भी ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक समरसता के आयोजन निरंतर होते रहेंगे और समाज को जोड़ने का कार्य चलता रहेगा।

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