मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संचालित ‘संकल्प से समाधान अभियान’ प्रशासनिक जवाबदेही और जनसुनवाई व्यवस्था का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। मुख्यमंत्री सीएम डॉ. मोहन यादव सरकार की पहल पर प्रदेशभर में चलाए गए इस अभियान के तहत लाखों नागरिकों की समस्याओं का रिकॉर्ड स्तर पर समाधान किया गया।

राज्य सरकार द्वारा 12 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक यह विशेष अभियान संचालित किया गया, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों और समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना था। अभियान के दौरान प्रदेशभर से कुल 47 लाख 69 हजार आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 47 लाख 68 हजार प्रकरणों का निराकरण कर दिया गया, जो लगभग 99.9 प्रतिशत समाधान दर को दर्शाता है।

यह आंकड़ा प्रशासनिक दृष्टि से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इतने बड़े स्तर पर आवेदन प्राप्त होने के बाद भी अधिकांश मामलों का समय पर समाधान किया गया। सरकार का दावा है कि यह अभियान केवल शिकायत निवारण तक सीमित नहीं था, बल्कि शासन और जनता के बीच संवाद और भरोसा मजबूत करने का प्रयास भी था।

‘संकल्प से समाधान अभियान’ के दौरान गांव-गांव और शहरों में विशेष शिविर लगाए गए, जहां नागरिकों की समस्याएं सीधे सुनी गईं। राजस्व, सामाजिक सुरक्षा, प्रमाण पत्र, सरकारी योजनाओं का लाभ, पेंशन, भूमि विवाद और अन्य प्रशासनिक मामलों से जुड़े आवेदन बड़ी संख्या में दर्ज किए गए।

सरकार ने इस अभियान के तहत विभागीय समन्वय, डिजिटल मॉनिटरिंग और समयबद्ध समीक्षा व्यवस्था को मजबूत किया। प्रत्येक आवेदन की निगरानी की गई ताकि लंबित मामलों को शीघ्रता से निपटाया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकार की प्रशासनिक क्षमता का आकलन इस बात से किया जाता है कि वह आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान कितनी तेजी और प्रभावशीलता से करती है। ऐसे में ‘संकल्प से समाधान अभियान’ को सुशासन और पारदर्शिता का मजबूत उदाहरण माना जा सकता है।

प्रदेश में बड़ी संख्या में शिकायतों के समाधान से यह भी संकेत मिलता है कि लोग अब अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन तक पहुंचने में अधिक सक्रिय हो रहे हैं। वहीं शासन स्तर पर जवाबदेही बढ़ने से जनता का भरोसा भी मजबूत होता है।

सरकार इस अभियान को एक दीर्घकालिक प्रशासनिक मॉडल के रूप में देख रही है, जिससे भविष्य में भी जनसमस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जा सके।

‘संकल्प से समाधान अभियान’ के नतीजे यह बताते हैं कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और तकनीकी निगरानी को सही तरीके से लागू किया जाए, तो बड़ी संख्या में समस्याओं का समाधान कम समय में संभव है।

PUBLICFIRSTNEWS.COM

Share.
Leave A Reply