इंडिया फर्स्ट | भोपाल | दक्षिण अफ्रीका व नामीबिया से लाकर कूनो नेशनल पार्क में बसाए गए चीतों में से एक और नर चीता तेजस की मौत हो र्गइ। उसके गले पर चोट के निशान पाए गए हैं। बताया जा रहा है कि तेजस चीते के बाड़े में सहवास के लिए नाभा चीता को छोड़ा गया था, जिससे संघर्ष के दौरान तेजस घायल हुआ और उसकी मौत हो गई।

इससे पहले भी दक्षा चीता की मौत दो चीतों को एक साथ बाड़े में सहवास के लिए छोड़े जाने के दौरान संघर्ष में हो चुकी है। अधिकारी इस संबंध में फिलहाल चुप्पी साधे हैं। उधर, कूनो पार्क के संभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) पीके वर्मा का कहना है कि तेजस अपने बाड़े में अकेला था। चोट कैसे लगी, इसकी जांच कराई जा रही है।

अलग-अलग बाडों में पांच चीते रखे गए थे, जिसमें तेजस की मौत के बाद चार चीते बचे हैं, जबकि खुले जंगल में 12 चीते हैं।बता दें कि नामीबिया से आठ और दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते लाए गए थे। एक मादा चीता ने चार शावकों को कूनो पार्क में जन्म दिया था। इनमें से अब तक चार वयस्क चीतों और तीन शावकों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को चीता तेजस अपने बाड़े में घायल अवस्था में देखा गया था।

कूनो प्रबंधन के अनुसार सुबह 11 बजे निगरानी दल ने नर चीता तेजस की गर्दन के ऊपरी हिस्से में चोट के निशान देखे थे। इसकी सूचना पालपुर मुख्यालय पर उपस्थित वन्य प्राणी चिकित्सकों को दी गई। चिकित्सकों द्वारा मौके पर जा कर चीते का मुआयना किया एवं प्रथम ²ष्टया घावों को गंभीर पाया। तेजस को बेहोश कर उपचार किया गया। दिन में दो बजे निगरानी दल को बाड़े में तेजस मृत पड़ा मिला। पोस्टमार्टम के पश्चात मृत्यु के असल कारणों का पता लगाया जा सकेगा।

भोपाल के डाक्टरों ने किया पोस्टमार्टम

पोस्टमार्टम भोपाल के डाक्टरों की टीम द्वारा किया जाएगा। टीम में दो डाक्टर भोपाल से आएंगे और तीन स्थानीय डाक्टर शामिल रहेंगे। पीएम के बाद सैंपल को जांच के लिए जबलपुर की लैब में भेजा जाएगा। चीतों की निगरानी में वर्षा बन रही बाधा, जीपीएस दे रहा धोखामानसून सीजन में कूनो पार्क के जंगल में छोड़े गए चीतों की निगरानी चुनौती बन रही है। खासकर उस समय जब तेज वर्षा होने लगती है। तब चीतों के कालर आइडी से सिग्नल या तो टूट जाता है या कमजोर हो जाता है।

जीपीएस बाधित होने से निगरानी मुश्किल हो जाती है। चीतों की निगरानी और सुरक्षा के लिए इन्हें रेडियो कालर आइडी पहनाए गए हैं। इसमें जीपीएस भी लगा है। तीन दिनों से आशा की लोकेशन कूनो से बाहर कूनो नेशनल पार्क से मादा चीता आशा तीन दिनों से बाहर है। उसकी लोकेशन आगर के जंगल में मिल रही है। आशा पूर्व में भी कूनो की सीमा को लांघ कर दूसरे जंगल में जा चुकी है। ऐसे में उसको लेकर विशेष निगरानी बरती जा रही है। वर्मा का कहना है कि आशा की सतत निगरानी कर रहा है। तेज वर्षा के दौरान सिग्नल टूटने से थोड़ी परेशानी जरूर हो रही है। publicfirstnews.com

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